छत्तीसगढ़ के दुर्ग ज़िले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है।
सरकारी नौकरी का झांसा देकर करीब 200 लड़कियों को बंधक बनाया गया।
बताया जा रहा है कि गुडवे फैशन प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी, जो कॉस्मेटिक और कपड़ों का कारोबार करने का दावा करती है, असल में लड़कियों से अवैध काम करवाती थी।
पीड़िताओं ने बताया कि उन्हें 25 से 30 हज़ार रुपए सैलरी का लालच देकर बुलाया गया, लेकिन वहां न नौकरी मिली, न पैसा। उल्टा उनके मोबाइल छीन लिए गए और परिवार से बात करने तक की इजाज़त नहीं दी गई।
कंपनी की सीनियर लड़कियां उन पर दबाव बनाती थीं कि फेसबुक और इंस्टाग्राम पर लड़कों को फंसाओ, उन्हें ऑफिस बुलाओ, तभी पेमेंट मिलेगा।
कई बार आधी रात तक सोशल मीडिया पर अजनबी लड़कों से चैट करने के लिए मजबूर किया जाता था।
एक पीड़िता ने खुलासा किया कि जॉब पाने के लिए 46 हज़ार रुपए तक की डिमांड की जाती थी।
घरवालों को धोखा देकर कहा जाता कि सरकारी नौकरी मिल गई है और दस्तावेज़ या नॉमिनी के नाम पर पैसे देने होंगे।
हालात इतने खराब थे कि खाना तक समय पर नहीं दिया जाता था। दिन में सिर्फ़ दो वक्त का थोड़ा-सा खाना और रात दो-तीन बजे तक जबरन चैटिंग।
इसी प्रताड़ना से तंग आकर भानुप्रतापपुर की एक लड़की आत्महत्या करने जा रही थी, लेकिन बाकी लड़कियों ने उसे रोक लिया।
मामले का खुलासा तब हुआ, जब एक लड़की ने किसी तरह अपने माता-पिता से संपर्क किया।
परिवार ने आरएसएस और बजरंग दल से मदद मांगी। इसके बाद विजयादशमी के दिन लड़की और 4 अन्य पीड़िताओं को किसी तरह कंपनी से बाहर निकाला गया।
3 अक्टूबर को बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने कंपनी में हंगामा किया, जिसके बाद पुलिस ने रामभरोष साहू, सत्यम पटेल, साहिल कश्यप, सौरभ चौधरी, राहुल सौंधिया, वेदप्रकाश शास्त्री और साधना पटेल सहित सात लोगों पर केस दर्ज किया।
पीड़िताओं का कहना है कि कंपनी में असल में न जॉब थी, न पढ़ाई… बल्कि सिर्फ पैसों की चेन बनाने का खेल चल रहा था।
फिलहाल, पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और बाकी लड़कियों को सुरक्षित निकालने की कवायद जारी है।

