भिलाई नगर निगम के वीआईपी इलाकों में शुमार स्मृति नगर का वार्ड नंबर 2 इन दिनों नरक का पर्याय बन चुका है। भीषण गर्मी के इस मौसम में जहाँ लोग पानी की बूंद-बूंद को तरसते हैं, वहीं यहाँ के लोग सड़कों पर जमा दूषित पानी, भयंकर बदबू और मच्छरों के आतंक के बीच जीने को मजबूर हैं। वजह है… कभी जीवनदायिनी रही यह नहर, जो आज अतिक्रमण और प्रशासनिक लापरवाही के कारण एक संकीर्ण और जानलेवा नाले में तब्दील हो चुकी है। जलभराव का आलम यह है कि दूषित पानी अब गलियों से होता हुआ लोगों के दरवाजों तक पहुँच गया है।,,,, स्थानीय निवासी राजेंद्र सिंह कहते है “स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि यहाँ सांस लेना मुश्किल है। बीमारियां फैल रही हैं। हमने कई बार शिकायत की पर कोई नहीं सुनता। अब तो ऐसा लगता है कि अपना पुश्तैनी आशियाना बेचकर यहाँ से कहीं दूर पलायन कर जाएं।”
वही स्मृति गृह निर्माण सहकारी संस्था के अध्यक्ष राजीव चौबे कहते है “नगर निगम और सिंचाई विभाग दोनों को कई बार लिखित में दिया है। दोनों विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालते हैं। क्या प्रशासन यहाँ किसी बड़ी महामारी के फैलने का इंतजार कर रहा है? अगर जल्द सफाई नहीं हुई तो हम उग्र आंदोलन करेंगे।”
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नगर निगम और सिंचाई विभाग (इरिगेशन) दोनों ही इस गंभीर समस्या पर कुंभकर्णी नींद सोए हुए हैं। बार-बार की शिकायतों के बाद भी अधिकारियों की संवेदनहीनता बरकरार है। हालाँकि, जब मीडिया ने इस मुद्दे पर प्रशासन को घेरा, तब जाकर निगम की तरफ से कागजी पत्राचार की बात सामने आई है।भिलाई निगम आयुक्त राजीव पांडेय कैमरे पर बयान देते हुए कहते है इस नहर के विषय में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण (Encroachment) की बात सामने आई है, जो काफी लंबे समय से हुआ है। हमने इस संबंध में सिंचाई विभाग से पत्राचार किया है। जैसे ही संयुक्त सीमांकन की प्रक्रिया पूरी होती है, जल्द ही अतिक्रमण हटाने और नहर की सफाई की कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
“निगम आयुक्त ने कार्रवाई का भरोसा तो दिया है, लेकिन सवाल यह है कि सालों से हो रहे इस अतिक्रमण पर प्रशासन अब तक मौन क्यों था? और तब तक इन बदबूदार गलियों में रहने वाले लोग किस तरह अपनी जिंदगी काटेंगे? अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो वार्ड-2 के आक्रोशित नागरिकों का यह गुस्सा किसी भी दिन सड़क पर फूट सकता है।”

