सत्य, सेवा और समरसता के प्रतीक
गुरु नानक देव जी का 556वां प्रकाश पर्व
पूरे विश्व में गूंजे, ‘जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के जयकारे
भिलाई के गुरुद्वारों में छाया भक्ति का उल्लास
संगत ने लिया अमृतवाणी का आनंद
गुरु का लंगर, कीर्तन और रक्तदान
श्रद्धा, सेवा और मानवता का संगम

