3 नवंबर को सेक्टर 9 अस्पताल के निजीकरण की खबर को लेकर हलचल शुरू हुई और देर शाम तक भिलाई का माहौल गर्म हो गया। सीटू ने आपातकाल बैठक बुलाई और निर्णय लिया कि सपरिवार सेक्टर 9 अस्पताल पहुंचकर न केवल प्रबंधन को विरोध पत्र देंगे बल्कि इस निर्णय को वापस लेते तक हर मोर्चे पर संघर्ष को तेज करेंगे जिसके तहत सपरिवार सेक्टर 9 पहुंचकर अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (इंचार्ज) को पत्र दिया और कहा कि केंद्र सरकार के इशारे पर सेल प्रबंधन द्वारा सेक्टर 9 अस्पताल को निजी हाथों में देने की बात संज्ञान में आई है यदि यह बात सही है तो यह कार्य जन विरोधी है जिसे अभिलंब वापस लिया जाना चाहिए। पत्र में सीटू ने कहा कि “हम आपको यह अवगत कराने के लिए बाध्य हुए हैं कि भिलाई इस्पात संयंत्र चिकित्सा विभाग प्रबंधन द्वारा पूरे चिकित्सा विभाग को किसी निजी कॉर्पोरेट समूह को सौंपने हेतु की जा रही पहल की खबर, कर्मियों के बीच चर्चा का विषय है। उक्त समाचार के पश्चात सभी कर्मचारियों, उनके आश्रित परिजनों एवं सेवानिवृत कर्मचारीगण चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता एवं निरंतरता को लेकर आशंकित व आक्रोशित हैं।चिकित्सा सेवाएं सभी कर्मचारियों की सेवा शर्तों का हिस्सा है जिसमें किसी भी तरह का एकतरफा परिवर्तन औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 9 का उल्लंघन होगा। अतः कर्मचारियों के प्रतिनिधि यूनियन एवं अधिकारियों के प्रतिनिधि संगठन से चर्चा व उनकी सहमति के बिना चिकित्सा सेवाओं में किसी भी तरह का परिवर्तन ना किया जाए । चिकित्सा सेवाओं को किसी भी रूप में किसी निजी कॉर्पोरेट समूह को सौंपने की पहल का कड़ा विरोध किया जाएगा । सीटू नेताओं ने कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र के कर्मी देश के लिए लोहा बनाते हैं जिसका देश के विकास में अहम भूमिका है ऐसे महत्वपूर्ण उद्योग में काम करने वाले कर्मियों के लिए जो मूलभूत सुविधाएं मिली हुई है उसमें अस्पताल की सुविधा सबसे महत्वपूर्ण है किंतु सरकार केवल स्टील बनाने का नारा देकर घाटे का हवाला देकर मूलभूत सुविधाओं के साथ खिलवाड़ कर रही है सीटू इसे बर्दाश्त नहीं करेगा।।

