रायपुर, 20 फरवरी, भिलाई विधायक देवेंद्र यादव
को सुप्रीम कोर्ट ने बलौदा बाज़ार हिंसा मामले में ज़मानत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस सुधांशु धुलिया की बेंच ने देवेंद्र यादव की ओर से पेश इस ज़मानत याचिका की सुनवाई की जिसे एडवोकेट सिद्धार्थ देव और एडवोकेट हर्षदीप खुराना ने पेश किया और तर्क दिए थे। भिलाई विधायक देवेंद्र यादव को बलौदा बाज़ार पुलिस ने बीते 18 अगस्त 2024 को भिलाई स्थित निवास से हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया था।
क्या था बलौदा बाज़ार कांड
छत्तीसगढ़ के बलौदा बाज़ार में 10 जून 2024 को सतनामी पंथ के विरोध प्रदर्शन में शामिल भीड़ उपद्रवियों में तब्दील हो गई। उपद्रवियों की इस भीड़ ने कलेक्ट्रेट और एसपी ऑफ़िस में आगजनी की। हिंसा पर आमादा भीड़ ने कई वाहनों को जला दिया और हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिशें कर रहे पुलिस
विवेचना के अनुसार इस हिंसक उपद्रव के पीछे भीम रेजीमेंट नामक संगठन के स्वंयभू संस्थापक और प्रदेश अध्यक्ष दिनेश कुमार का अहम और केंद्रीय किरदार था। उपद्रव के पहले सोशल मीडिया पर दिनेश कुमार ने कई संदेश जारी किए जिनमें हिंसा के लिए उकसाने की पर्याप्त विषयवस्तु मौजूद थी। विवादित भीम रेजीमेंट के इस स्वयंभू अध्यक्ष ने सनातन धर्म संस्कृति और परंपराओं को गहरी चोट पहुँचाने वाले बयान दिए। अतिवादी और हिंसक उपद्रव के मुख्य कारक दिनेश कुमार को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई, और उसने अपनी सुविधा से अदालत में सरेंडर किया। कोर्ट से पुलिस ने उसे रिमांड पर लिया।
देवेंद्र यादव क्यों गिरफ्तार
बलौदा बाज़ार पुलिस का दावा है कि, हिंसा और आगजनी जिसमें लोगों को चोटें आईं और करोड़ों की संपत्ति का नुक़सान हुआ, उस हिंसक उपद्रव के षड्यंत्र में विधायक देवेंद्र यादव की भुमिका थी। पुलिस ने इसके पीछे यह आधार बताया कि, भीड़ के हिंसक हमले के ठीक पहले सभा स्थल पर विधायक देवेंद्र यादव पहुँचे थे और मंच के नीचे बैठे थे। पुलिस ने यह तर्क भी अपने अन्वेषण में पेश चकिया कि, बलौदा बाज़ार ना तो विधायक देवेंद्र यादव का विधानसभा क्षेत्र था ना ही बिलासपुर लोकसभा का, जहाँ से देवेंद्र यादव ने लोकसभा का चुनाव लड़ा था। विधायक देवेंद्र यादव ने पुलिस के आरोपों को हमेशा ख़ारिज किया। विधायक देवेंद्र यादव ने मीडिया से कहा -“मुझे आंदोलन की सूचना और आमंत्रण मिला था, मैं आक्रोशित समाज को समर्थन देने कुछ देर के लिए गया था
और बेहद ही जल्द अगले कार्यक्रम के लिए निकल गया था, ना तो हिंसा को मेरा समर्थन है और ना दोषियों को संरक्षण। पुलिस वास्तविक आरोपियों को खोजे।”
पुलिस की थ्योरी और कार्यवाही पर सवाल
जिस अंदाज़ में इस मामले में देवेंद्र यादव को पुलिस के ज़रिये निशाना पर लिया गया और कार्यवाही की गई, उसे लेकर देवेंद्र यादव के समर्थकों ने इसे राज्य या कि सत्ता प्रायोजित कार्यवाही माना। प्रकरण में देवेंद्र यादव की भुमिका पर पुलिस की थ्योरी को एडवोकेट एस फरहान ने प्रश्नांकित किया हुआ है। रायपुर के प्रख्यात अधिवक्ता एस फरहान ने सवाल किया था-“षड्यंत्र का आरोप लगाने से पुलिस षड्यंत्र साबित नहीं कर पा रही है, पूरी विवेचना में झोल ही झोल है। कहीं कोई तथ्य देवेंद्र यादव के खिलाफ स्थापित नहीं होता है।”
जेल यात्रा से सियासती फ़ायदा
विधायक देवेंद्र सिंह यादव बलौदा बाज़ार केस में छः महीने जेल में रहे। लेकिन राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि, इस जेल यात्रा ने देवेंद्र का राजनीतिक क़द उनके समकालीन नेताओं के बीच बड़ा कर दिया है। कांग्रेस के भीतरखाने बहुत कुछ देवेंद्र यादव के बाहर आने पर बदल सकता है। यह देखना भी ग़ौरतलब है कि, देवेंद्र यादव और उनके समर्थकों ने गिरफ़्तारी की कार्यवाही को भी सशक्त राजनीतिक संदेश में तब बदल दिया जबकि देवेंद्र सिंह यादव पुलिस अभिरक्षा में ही पुलिस की गाड़ी की छत पर एक
हाथ में संविधान और एक हाथ जमें सतनाम पंथ प्रतीक सफेद झंडे के साथ खड़े हो गए और ललकारने के अंदाज़ में नुमाया हुए। जेल यात्रा के छः महीने में भी देवेंद्र यादव ने वह व्यूह रचना रची कि, मतदाताओं को जीवंतता लगती रही और सहानुभूति भी मिलती रही।
देवेंद्र के लिए एक मुश्किल और है ?
राजनीतिक विश्लेषकों का एक समूह यह मानता है कि, बिलाशक बलौदा बाज़ार कांड में जेल यात्रा विधायक देवेंद्र सिंह यादव का राजनीतिक ग्राफ़ उपर खींच गई है लेकिन हाईकोर्ट में विचाराधीन एक मामला देवेंद्र के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। यह प्रकरण देवेंद्र सिंह यादव के निर्वाचन को चुनौती देता है, जिसे प्रेम प्रकाश पांडेय की ओर से दायर किया गया है।
📢 बड़ी खबर: विधायक देवेंद्र यादव को मिली रिहाई! 🎉
🔹 शुक्रवार, 21 फरवरी को देवेंद्र यादव जेल से रिहा होंगे।
🔹 सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद, अब वे अपने समर्थकों के बीच लौटेंगे।
🔹 समर्थकों में खुशी की लहर, स्वागत की तैयारियाँ ज़ोरों पर।
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