करीब डेढ़ घंटे की प्रैक्टिस के बाद मॉकड्रिल का फर्स्ट फेज खत्म हुआ। पहले फेस में SDRF ने आग लगने पर एक्शन और घायल जवानों को कैसे ले जाया गया यह बताया गया।
जानिए क्या हुआ ब्लैकआउट के दौरान
7.30 बजे “रेड अलर्ट” सायरन यानी कम ज्यादा आवाज में दो मिनट तक सायरन बजाया गया।
रेड अलर्ट सायरन बजने पर सभी नागरिकों ने अपने घर, दुकान, ऑफिस की रोशनी बंद की।
सड़क पर चल रहे वाहन को रेड अलर्ट सायरन बजते ही रुकना पड़ा। उनकी भी हेडलाइट और बैकलाइट बंद की गई।
7.42 बजे ग्रीन अलर्ट सायरन (एक समान आवाज में) बजा। इसे “ऑल क्लियर सिग्नल” भी कहा गया। इस सायरन के बजने के बाद लाइट्स ऑन की गई।
दोपहर के करीब चार बजते ही एक तेज सायरन बजा। ये किसी फायर अलार्म की तरह था, जिसकी आवाज करीब 6 किलोमीटर के रेडियस में आसानी से सुनी जा सकती थी। सायरन की आवाज सुनते ही पुलिस के अधिकारियों और जवानों ने चलती गाड़ियां रुकवा दी।
एक अधिकारी ने अनाउंसमेंट किया, “इट्स ए इमरजेंसी सिचुएशन। गाड़ी छोड़कर सब ज़मीन पर लेट जाइए। कानों को दोनों हाथों से बंद कर लें और होठों के बीच जमकर अपना रूमाल फंसा ले। जब तक अलार्म न बंद हो पोजिशन कोई चेंज नहीं करेगा।
लोगों ने तुरंत रिस्पांस किया और इंस्ट्रक्शन फॉलो किया। करीब 15 मिनट के बाद दूसरी अनाउंसमेंट हुई “वी आर सेफ नाउ। अब आप सभी कुछ देर में घर जा सकते हैं”। लोग जमीन से उठते ही एक दूसरे से कानों में फुसफुसाने लगे। “दिक्कत होगी चलेगा लेकिन पाकिस्तान को सबक मिलना चाहिए”।
इन्ही में से एक युवा से हमने पूछा जो हुआ उससे आपको डर नहीं लगा। दूसरी ओर से जवाब आया- डर किस बात का, ये सब देश हित में हो रहा है। आस-पास बाकी बचे लोगों की आंखों में यही जवाब था। बातचीत के बीच ही ट्रैफिक ओपन हो गया और लोग अपने घरों की ओर बढ़ गए।
मौके पर मौजूद दुर्ग ग्रामीण के एडिशनल एसपी अभिषेक झा ने बताया कि ये सिविल डिफेंस मॉकड्रिल का फर्स्ट फेज था। शाम 7:30 बजे, दूसरा फेज शुरू किया जाएगा। इस दौरान भिलाई स्टील प्लांट से सटे पूरे इलाकों में 15 मिनट का ब्लैकआउट रहेगा। इसके बाद हमने 7:30 बजने का इंतजार किया।
ब्लैक आउट से करीब आधे घंटे पहले हम बीएसपी से सटे इलाकों में पहुंचे। इन्ही में से एक था भिलाई सेक्टर-1 का मुर्गा चौक। यहां से भिलाई स्टील प्लांट का गेट कुछ 400 मीटर ही दूर है। हमने मुर्गा चौक से गुज़र रहे ओवर ब्रिज पर पोजीशन ली।
तब बीएसपी तक पहुंचने वाली सड़क स्ट्रीट लाइट की रोशनी से चमक रही थी। तेज रफ़्तार से वाहन गुज़र रहे थे। इस बीच 7:30 बजे एक बार फिर सायरन बजा और पूरे भिलाई में अंधेरा छा गया। दूर से चमक रहा भिलाई स्टील प्लांट अचानक आंखों से ओझल हो गया।
पुलिस की ओर अनाउंसमेंट हुआ “सभी अपनी गाड़ियों की लाइट्स ऑफ़ कर दें। कार और बाइक जहां हैं, वहीं उसे पार्क कर ज़मीन पर लेट जाएं। मूवमेंट न करें, इलाके में हवाई हमला हुआ है।” अगले 15 मिनट तक जीरो मूवमेंट और ब्लैकआउट रहा। 7:45 पर फिर रोशनी लौटी और इस तरह जिले में सिविल डिफेंस मॉकड्रिल का दूसरा फेज समाप्त हुआ।
भिलाई स्टील प्लांट के चलते यहां हुई मॉकड्रिल
देश के 244 इलाकों में ये मॉकड्रिल हुई जिसमें छत्तीसगढ़ का दुर्ग-भिलाई शहर भी शामिल था। भिलाई स्टील प्लांट को देखते हुए दुर्ग को अलर्ट पर रखा गया। सिविल डिफेंस डिस्ट्रिक्ट्स को उनकी संवेदनशीलता के आधार पर 3 कैटेगरी में बांटा गया है। कैटेगरी-1 सबसे संवेदनशील और कैटेगरी-3 कम सेंसेटिव है। इसमें दुर्ग कैटेगरी-2 में शामिल है।

