भिलाई के सुपेला वार्ड 17 से एक बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां पानी टंकी की टेस्टिंग लगातार छठी बार भी फेल हो गई है। यह सिर्फ एक तकनीकी खामी नहीं, बल्कि सीधे तौर पर जनता के साथ हो रहा खिलवाड़ माना जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, टंकी की टेस्टिंग के दौरान घटिया निर्माण और लापरवाही की पोल खुलकर सामने आई। पाइपलाइन के जॉइंट्स और वाल्व ठीक से बंद नहीं किए गए थे, जिसके चलते लाखों लीटर पानी सड़कों पर बह गया। बताया जा रहा है कि करीब 8 लाख लीटर पेयजल यूं ही बर्बाद हो गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस समय यह पानी सड़कों पर ‘सैलाब’ बनकर बह रहा था, उसी समय सुपेला क्षेत्र के कई इलाकों में लोग भीषण गर्मी के बीच बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे थे। एक तरफ सड़कें पानी से ‘स्विमिंग पूल’ जैसी नजर आ रही थीं, तो दूसरी तरफ जनता की प्यास बुझाने के लिए पर्याप्त पानी तक उपलब्ध नहीं था।
यह पूरा मामला ठेकेदार की मनमानी और घटिया निर्माण कार्य की ओर इशारा करता है। बार-बार टेस्टिंग के नाम पर पानी की बर्बादी हो रही है, लेकिन जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। सवाल यह भी उठता है कि आखिर छठी बार फेल होने के बाद भी इस प्रोजेक्ट को गंभीरता से क्यों नहीं लिया जा रहा?
स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि एक ओर सरकार पानी बचाने की अपील करती है, वहीं दूसरी ओर इस तरह की लापरवाही से लाखों लीटर पानी यूं ही बर्बाद किया जा रहा है।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक जनता की प्यास के साथ इस तरह का खिलवाड़ चलता रहेगा? और क्या इस बार जिम्मेदारों पर कोई सख्त कार्रवाई होगी, या फिर मामला यूं ही ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

