छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में इन दिनों भीषण गर्मी का कहर जारी है…
जहां तापमान लगातार बढ़ते हुए आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है…
लेकिन इस तपती गर्मी का असर सिर्फ इंसानों पर ही नहीं… बल्कि बेजुबान जानवरों पर भी साफ तौर पर देखा जा रहा है।

दुर्ग और भिलाई में पिछले कई दिनों से तापमान लगातार चढ़ता जा रहा है…
और अप्रैल के शुरुआती दिनों में ही पारा 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है…
जिससे लोगों का घर से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया है।

इसी बीच एक संवेदनशील और राहत भरी पहल देखने को मिल रही है भिलाई के मैत्री बाग में…
जो कि Bhilai Steel Plant के अधीन संचालित होता है और भारत-रूस मैत्री का प्रतीक भी माना जाता है।

यहां जू प्रबंधन ने बेजुबान जानवरों को गर्मी से बचाने के लिए खास इंतजाम किए हैं…
क्योंकि बढ़ते तापमान का असर अब जंगली जानवरों के व्यवहार पर भी साफ दिखाई देने लगा है।

चिलचिलाती धूप और तपती गर्मी के बीच… जंगल का राजा शेर भी अब सुस्त पड़ता नजर आ रहा है…
जिसकी दहाड़ कभी गूंजती थी… अब गर्मी के कारण धीमी होती दिखाई दे रही है।

मैत्री बाग में शेरों और अन्य वन्य प्राणियों को राहत देने के लिए ठंडे पानी के फव्वारों की व्यवस्था की गई है…
जहां शेर पानी में अठखेलियां करते हुए गर्मी से राहत लेते नजर आ रहे हैं।

जू प्रबंधन द्वारा दिन में 6 से 7 बार ठंडे पानी की बौछार की जा रही है…
साथ ही पिंजरों के अंदर छोटे-छोटे तालाब बनाए गए हैं…
जिनमें ठंडा पानी भरकर समय-समय पर बदला जाता है…
ताकि जानवरों को लगातार ठंडक मिलती रहे।

आपको बता दें कि मैत्री बाग में शेर, बंगाल टाइगर, व्हाइट टाइगर, भालू, हिरण समेत सैकड़ों वन्य जीव मौजूद हैं…
और सभी के लिए अलग-अलग तरीके से गर्मी से बचाव के उपाय किए जा रहे हैं।

खासतौर पर टाइगर जैसे जानवर तापमान के प्रति बेहद संवेदनशील होते हैं…
और 35 डिग्री से ऊपर का तापमान उनके लिए परेशानी का कारण बन सकता है…
ऐसे में उन्हें ठंडा वातावरण और पानी उपलब्ध कराना बेहद जरूरी हो जाता है।

इतना ही नहीं… जानवरों के खानपान में भी बदलाव किया गया है…
उन्हें पानी से भरपूर आहार दिया जा रहा है… ताकि उनके शरीर में पानी की कमी न हो।

भालू, हिरण और अन्य वन्य प्राणियों के बाड़ों में भी आर्टिफिशियल कूलिंग सिस्टम लगाए गए हैं…
जिससे उन्हें इस भीषण गर्मी से राहत मिल सके।

कुल मिलाकर… बढ़ती गर्मी के बीच मैत्री बाग का यह प्रयास न सिर्फ सराहनीय है…
बल्कि यह संदेश भी देता है कि इंसानों के साथ-साथ बेजुबान जानवरों की देखभाल भी हमारी जिम्मेदारी है।

By editor