भारत पर विदेशी आक्रांताओं का इतिहास !गुलामों ने भी भारत पर शासन किया !

1 –  भारत पर पहला विदेशी आक्रमण 550 ईसा पूर्व ईरान के सम्राट साइरस द्वारा भारत की उत्तर पश्चिम सीमाओं पर किया गया और साइरस सिंधु नदी के पश्चिम में गांधार जैसे सभी भारतीय जनजातियों को फारसी नियंत्रण में लाने में सफल रहा ,उसके बाद पंजाब और सिंध पर सायरस के पोते डेरियस प्रथम ने कब्जा कर लिया।
 उस समय गांधार, कम्बोज और मद्र जैसे कई छोटे प्रांत थे जो लगातार एक-दूसरे से लड़ते रहते थे ,क्योंकि हिन्दुओं में एकता नहीं थी !

2 – सिकंदर – सिकंदर – 326  ईसा पूर्व के वसन्त में सिकंदर ने सिन्धु नदी पार कर भारत भूमि पर कदम रखे।  सिन्धु नदी पार करने के बाद तक्षशिला के शासक आम्भी, जिसका राज्य सिन्धु तथा झेलम नदियों के बीच फैला ने अपनी पूरी प्रजा तथा सेना के साथ सिकन्दर के सम्मुख आत्म-समर्पण कर दिया तथा अपनी राजधानी में सिकन्दर का भव्य स्वागत किया। तक्षशिला में एक दरबार लगा जहाँ पास-पड़ोस के अनेक छोटे-छोटे राजाओं ने सिकन्दर के सामने बहुमूल्य सामग्रियों के साथ आत्म-समर्पण किया। इस प्रकार तक्षशिला में खुशियाँ मनाते हुए सिकन्दर ने झेलम तथा चिनाव के मध्यवर्ती प्रदेश के शासक पोरस  से आत्म समर्पण की माँग की। पोरस के लिये यह शर्त मर्यादा के विरुद्ध लगी। उसने यह संदेश भेजा कि वह यूनानी विजेता के दर्शन रणक्षेत्र में ही करेगा। यह सिकन्दर को खुली चुनौती थी। अतः वह युद्ध के लिए तैयार हुआ। यह युद्ध झेलम नदी के तट पर 326  ई०पू० सिकन्दर महान और पोरस के मध्य लड़ा गया था। इसको ‘वितस्ता का युद्ध’, ‘झेलम के नाम से जानते हैं।इस युद्ध में भी सिकंदर की विजय हुई। इसके बाद ग्लौचुकायन ,गान्दारिस , चेनाब और रावी नदियों के बीच के सारे राज्य ,रावी पार के गणराज्य ,दक्षिणी-पश्चिमी पंजाब के अम्बष्ठ, क्षतृ तथा वसाति गणराज्य , राजस्थान , गुजरात , मालवा तथा कन्नौज तक जीतता चला गया क्योंकि हिन्दुओं में एकता नहीं थी !

3 – 712 ईस्वी में खलीफा का सेना पति 17 साल का लड़का मुहम्मद बिन क़ासिम , ईरान के शिराज़ शहर से 6000 सीरियाई सैनिकों,600  ऊंटों की सेना तथा 3000  सामान ढोने वाले बाख्त्री ऊंट लेकर निकला और भारत पर पहला इस्लामिक आक्रमण किया सिंध और पंजाब को जीत लिया तथा भारत के सारे हिन्दू राजाओं को इस्लाम कबूलने अथवा युद्ध की चुनौती भिजवाई और कन्नौज की तरफ बढ़ा तभी उसे वापस बुला लिया गया वो ऐसा कर पाया क्योंकि हिन्दुओं में एकता नहीं थी !

4 –  महमूद गजनवी ने 1000 से 1027 ईस्वी के बीच भारत पर 17 बार हमला किया
सोमनाथ के मनीर को लूटा और तहस नहस कर डाला। क्योंकि हिन्दुओं में एकता नहीं थी !

5 – मोहम्मद गोरी – मुहम्मद ग़ौरी और पृथ्वीराज चौहान के बीच तराईन के मैदान में दो युद्ध हुए। 1911  ई. में हुए तराईन के प्रथम युद्ध में पृथ्वीराज चौहान की विजय हुई किन्तु अगले ही वर्ष 1912  ई. में  तराईन के द्वितीय युद्ध में मुहम्मद ग़ौरी ने कनौज के राजा जयचंद की सहायता से छलपूर्वक पृथ्वीराज चौहान को परास्त किया और अपने  गुलाम क़ुतुबुद्दीन ऐबक को भारत  शासक बना दिया। जिस आर्यावर्त में  इक्ष्वाकु , दिलीप , हरिश्चंद्र , दशरथ , प्रभु राम चंद्र  , दुष्यंत , भरत , परीक्षित , बिन्दुसार , अजातशत्रु , महापद्म नन्द ,चन्द्रगुप्त मौर्य , अशोक ,  पुष्य मित्र , विक्रमादित्य , हर्षवर्धन , कनिष्क , राजेंद्र चोल , पृथ्वीवल्लभ मुंज , राजा भोज ,ललितादित्य जैसे महारथि हुए  अपने गुलाम क़ुतुब उद्दीन ऐबक को उस भारत का शासक बना कर मोहम्मद गोरी ने भारत की अस्मिता पर सबसे बड़ा तमाचा जड़ा और वो ऐसा कर सका क्यों की हिन्दुओं में एकता नहीं थी !
6 – 1206 से 1290 तक  भारत में गुलाम वंश का शासन रहा क्यों कि हिन्दुओं में एकता नहीं थी !

7 – खिलजी वंश  
ज़लालुद्दीन ख़िलजी ने 1290 में  ख़िलजी वंश की स्थापना की और इस वंश ने 1290 ई. से 1320 इ तक हम पर 40 वर्ष शासन किया क्योंकि हिन्दुओं में एकता नहीं थी !

8 – 1320 से 1414 तक  तुग़लक़ वंश ने 94 साल हम पर शासन किया क्योंकि हिन्दुओं में एकता नहीं थी !

9  –  1414 से 1451 तक  सैय्यद वंश ने  36  वर्ष  हम पर शासन किया क्योंकि  हिन्दुओं में एकता नहीं थी !

10 –  1451 से 1526 तक लोदी वंश ने 76 वर्ष  वर्ष  हम पर शासन किया क्योंकि  हिन्दुओं में एकता नहीं थी !

 11-   1526 से 1857 तक मुग़ल वंश ने  331 वर्षो हम पर शासन किया क्योंकि  हिन्दू एक नहीं थे !
 12 –  1857 से 1947 तक ब्रिटिशों ने हम पर शासन किया क्योंकि  हिन्दू एक नहीं थे !
13 – 1947 धर्म के आधार पर देश के दो टुकड़े हो गए मुसलमानों ने अपने लिए अलग देश ले लिया क्योंकि हम हिन्दू एक नहीं थे !
14 – 1948 कश्मीर के  एक तिहाई हिस्से पर पकिस्तान द्वारा कब्ज़ा कर लिया गया क्योंकि  हिन्दुओं में एकता नहीं थी  !

सिलसिला यहीं नहीं थमा 1948 से लेकर अब तक भारत अपने पडोसी देश द्वारा प्रायोजित धार्मिक आतंकवाद को निरंतर झेल रहा है।  भौगोलिक क्षेत्रफल , आर्थिक सम्पन्नता और सामरिक शक्ति में भारत के दसवें हिस्से से भी कम क्षमता वाला देश बेख़ौफ़ दुस्साहस के साथ भारत को ललकारता रहता है क्योंकि  हिन्दुओं में एकता नहीं है। पूरे विश्व में हिन्दू बाहुल आबादी वाले इस एकमात्र देश का हिन्दू भाषाई , क्षेत्रीय और जातीय आधार पर न सिर्फ बंटा हुआ है बल्कि इन्ही आधारों पर एक दुसरे से लड़ रहा है भीड़ रहा है और मर रहा है। और जब तक भारत का हिन्दू जातीय क्षेत्रीय और भाषाई भेदों से ऊपर उठ कर सिर्फ भारतीय हिन्दू के रूप में अपने पहचान स्थापित नहीं करेगा तब तक दुश्मन बेख़ौफ़ होकर षड्यंत्र करता रहेगा और भारत पर ऐसे आघात होते रहेंगे।  इसलिए आइये  जाती , भाषा और क्षेत्रीयता से मुक्त हो कर एक सशक्त और समृद्ध हिन्दू समाज के निर्माण के लिए एकजुट होने की पहल करें।  

By editor