मध्यप्रदेश के मंडला जिले के कान्हा किसली वन क्षेत्र के खटिया गांव से मेरे एक मित्र ने मुझे एक समाचार पत्र की कटिंग व्हाट्सएप पर शेयर की मेरे मित्र वाइल्डलाइफ फोटो ग्राफर हैं और वन्य तथा ग्राम पशु जीवन पर उनका गहरा अध्ययन है , आप खुद देखिये समाचार क्या है। महाराष्ट्र के बीड जिले के मजलगाओं की घटना का जिक्र है , कुत्तों ने बन्दर के बच्चे को मारा तो बंदरों एक महीने में 250 कुत्ते मार दिये पूरे गाँव में मात्र एक कुत्ता बचा है। ये सर्व विदित तथ्य है कि बन्दर शिकारी जानवर नहीं है अतः प्रकृति ने उसे शिकारी जानवरों की तरह पैने नाखून , मजबूत पंजे और जबड़े और मांसल तथा मजबूत काठी भी नहीं दी है इस फलाहारी जीव को बस वृक्षों अट्टालिकाओं में फुर्ती से चढ़ने की क्षमता प्रकृति ने दी है उसी का प्रयोग कर कुत्तों से बदला लेने बन्दर कुत्तों को उठा कर ले जाते हैं और ऊँचे मकत या वृक्ष के ऊपर लेजा कर नीचे फेंक देते है ऊँचाई से गिरने की वजह से से कुत्ते दम तोड़ दे रहे हैं। बन्दर का एक मासूम बच्चा जो कुत्तों के लीये पूर्णतः हानिरहित है उस एक बच्चे को आठ दस कुत्तों द्वारा मिल कर मार डालना ये श्वान प्रवृत्ति कहलाती है। कमजोर को घेर कर मारना और यदि कोई बलशाली आ जाये तो दम दबा कर भागना ये कुत्तों की प्रवित्ति होती है और ये सिर्फ कुत्तों की नहीं मनुष्यों में भी ये प्रवित्ति पाई जाती है यही नहीं दरअसल मनुष्यों में बहुत से जानवरों की प्रवित्ति पाई जाती है कुछ में श्वान कुछ में गज कुछ में सिंह तो कुछ वानर प्रवित्ति भी पाई जाती है।
बहरहाल आज का विषय है कश्मीर में जेहादियों द्वारा धार्मिक आधार पर नरसंहार क्या ये घटना महाराष्ट्र के बीड जिले के कुत्तों द्वारा मासूम बन्दर के बच्चे की हत्या की तरह ही नहीं है वहां तो बलहीन वानरों ने बुद्धि बल से कुत्तों से प्रतिशोध ले लिए लेकिन पहलगाम के सन्दर्भ में प्रश्न उठता है कि क्या हम बंदरों से भी गए बीते हैं ? ऐसा कहकर मैं भारत सरकार की त्वरित प्रतक्रिया की उम्मीद में उतावलापन नहीं दिखा रहा हूँ मैं जानता हूँ कि भारत सरकार की प्रतिक्रिया जरूर आएगी और इससे पहले भी पडोसी की हर छिछोरी हरकत पर भारत सरकार द्वारा प्रतिक्रिया दी गई है चाहे वो म्यांमार का सर्जिकल स्ट्राइक हो चाहे ुरी के बाद का सर्जिकल स्ट्राइक हो या फिर पुलवामा के बाद का एयर स्ट्राइक । लेकिन पर प्रश्न भारत साकार द्वारा हर बार दी जाने वाली तात्कालिक और क्षणिक प्रतिक्रिया पर है देखिये बीड महाराष्ट्र के उस गॉव में बंदरों ने एक बन्दर की हत्या के जवाब में एक कुत्ता नहीं मारा बल्कि पूरे गाओं के कुत्तों को ही निपटा दिया भारत पाक के सन्दर्भ में बन्दर और कुत्तों का उल्लेख किसी को व्यंग या किसी को मूर्खता लग सकता है है किन्तु वास्तव में घटना हमारे लिए एक दृश्टान्त है क्योंकि जिनका धर्म पूछ कर मारा गया है उन हिन्दुओं के परम आराध्य प्रभु श्रीराम ने त्रेता में इन्ही वानरों की चतुराई और चपलता से त्रिलोक विजयी रावण की सत्ता को समाप्त कर दिया था उस समय भी सीता हरण के बदले मात्र सीता की वापसी का विकल्प नहीं चुना गया था वार्ना जिस हनुमान ने लंका में घुस कर सोने की लंका जलाई थी वो भगवती सीता को वापस भी ला सकते थे किन्तु राम का उद्देश्य मात्र सीता की वापसी न हो कर आसुरी शक्तियों का पृथ्वी से समूल नाश करना था।
मेरा हमेश से दृढ मत रहा है कि इतिहास पढ़ने का नहीं गुनने का विषय है क्योंकि जब तक आप इसे गुनेंगे नहीं पिछली गलतियों का एहसास नहीं होगा और उन्ही गलतियों की पुनरावृत्ति होती रहेगी आइये एक नज़र डालते हैं इतिहास में हमने क्या गलतियां की जिसका भुगतान हम आज तक कर रहे हैं।
पहली गलती – 1947 में राजा हरी सिंह के भारत में शामिल होने के तत्काल बाद कश्मीर पहुंची भारतीय सेना ने जब कबाईलीयों के भेस में पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ना शुरू किया तो वे पाक सेना को इस्लामाबाद तक खदेड़ने की क्षमता रखते थे लेकिन उन्हें पूरे कश्मीर से बहार भी नहीं करने दिया और एक तिहाई कश्मीर को पाक को सौंप कर अंतर्राष्ट्रीय न्यायलय में औचित्यहीन वाद प्रस्तुत करना ।
दूसरी गलती – 1965 के युद्ध के दौरान पी ओ के हथियाने का अवसर खोना और अन्तराष्ट्रीय दबाव में आकर संघर्ष विराम की सहमति देना तथा ताशकंद समझते पर हस्ताक्षर करना।
तीसरी गलती 1971 में बांलादेश में पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण के बाद नब्बे हजार पाकिस्तानी सैनिकों की निशर्त रिहाई उस समय हारे पिटे पकिस्तान से 90 हजार सैनिकों के बदले पी ओ के वापसी की मांग न करना।
चौथी गलती – 1999 कारगिल युद्ध के समय एल ओ सी न लांघने और वायुसेना का उपयोग न करने की भारत की प्रतिबद्धता।
कल शाम सी सी एस की बैठक में जो पांच महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए 1- 1960 के सिंधु जल समझौते को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया। 2 – अटारी बॉर्डर को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया।
3 – सार्क वीज़ा योजना के तहत पाकिस्तानी नागरिकों को भारत में प्रवेश नहीं दिया जायेगा। 4 – भारत स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग में पदस्थ सभी सैन्य अधिकारीयों को एक सप्ताह के भीतर भारत छोड़ना होगा , भारत भी इसलामबाद स्थित भारतीय उच्चायोग में पदस्थ अपने सभी सैन्य अधिकारीयों को वापस बुला रहा है। 5 – दोनों उच्चायोगों में सहयोगी स्टाफ की संख्या में कमी की जा रही है वर्तमान की संख्या 55 को 30 में सीमित किया जा रहा है।
कुल मिला कर अब तक तो ये वही पुराना फार्मूला लगता है जो बासी कढ़ी में उबाल से ज्यादा कुछ भी नहीं है चिकित्सा प्रणाली में दो ही किस्म के चिकित्सक होते हैं पहला वो जो किसी भी बीमारी के निदान का त्वरित उपाय करता है , मान लीजिये आप के पेट में दर्द है पहला डॉ आपको पेट दर्द के लिए पेन किलर देगा जो कुछ ही देर में आपका दर्द ठीक कर देगी वहीँ दूसरा आपकी पूरी जाँच करेगा आपके रोग की जड़ में जायेगा और उस जड़ को ख़त्म करने का उपाय करेगा ठीक वैसा ही जैसा भगवन राम ने किया था सीता हरण पर सिर्फ सीता को वापस नहीं लाये थे अपितु ऋषि मुनि , नारी और वृद्धजनों का तिरस्कार करने वाली संस्कृति को समूल नष्ट कर दिया था। इसलिए अब भारत सरकार को भी एक बार में इस बिमारी का समूल नाश करना ही होगा जैसे 1971 में पकिस्तान के 2 टुकड़े हुए इस बार फिर पी ओ के वापस लेकर , बलूचिस्तान को स्वतंत्र कर पकिस्तान के तीन टुकड़े करने होंगे यही इस बिमारी का अंतिम और स्थाई निदान है।

