धर्म आस्था और आडंबर कहां जा रहा है सनातनी समाज

धर्म… आस्था… और आडंबर।
यह वो तीन पहलू हैं, जिनके इर्द-गिर्द सनातनी समाज की पहचान बुनती रही है। लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या समाज अपनी मूल आस्था से भटककर केवल आडंबर की ओर बढ़ रहा है?

मंदिरों में चढ़ावा, पूजा-पाठ में बढ़ता दिखावा, महंगे अनुष्ठान और धार्मिक आयोजनों में शक्ति प्रदर्शन… क्या यही सनातन संस्कृति की पहचान है? या फिर यह हमारी आस्था का कमजोर होता प्रतिबिंब?

विचारकों का मानना है कि सनातन धर्म की जड़ें हमेशा सादगी, सेवा और सत्य में रही हैं। लेकिन आधुनिक समय में आडंबर और प्रतिस्पर्धा ने धर्म को भी एक प्रदर्शन का माध्यम बना दिया है।

समाज में यह बहस अब ज़ोर पकड़ रही है कि आस्था को बनाए रखना है… या फिर दिखावे और अंधविश्वास की इस दौड़ में सनातनी समाज को अपनी असली पहचान खोनी पड़ेगी।

By editor