देवेंद्र की रिहाई से बीजेपी से ज्यादा कांग्रेस परेशान

भिलाई विधायक देवेंद्र यादव को सर्वोच्च न्यायलय से जमानत मिलने के बाद कल शाम रायपुर जेल से उनकी रिहाई हुई राजनैतिक गलियारों , मीडिया और आम जनता में  ये घटना  चर्चा का विषय बनी हुई है।  देवेंद्र यादव की रिहाई पर उनके सर्थकों द्वारा जो शक्ति प्रदर्शन किया गया उसके कई मायने निकलते हैं इन सभी पहलुओं पर आज हम विस्तार से चर्चा करेंगे। कल शाम रायपुर सेंट्रल जेल से देवेंद्र यादव की रिहाई के वक्त भारी संख्या में युवा कॉंग्रेस और एन एस यू आई के कार्यकर्ताओं के अतिरिक्त सतनामी समाज और यादव समाज के गैर राजनैतिक लोग भी मौजूद थे , इस भारी भीड़ में कितने लोग लाये गए थे और कितने स्वस्फूर्त थे ये बताना संभव नहीं है लेकिन देवेंद्र यादव की रिहाई को उनकी इमेज बिल्डिंग का टूल बनाने का भरपूर प्रयास हुआ और गौर तालाब है ये प्रयास कॉंग्रेस पार्टी का नहीं बल्कि देवेंद्र यादव की अपनी टीम का था क्योंकि इस पूरे घटना क्रम में कॉंग्रेस के बड़े नेताओं की अनुपस्थिति और रिहाई  देवेंद्र को प्रदेश कॉंग्रेस के मुख्यालय न लेजा कर सीधे भिलाई प्रस्थान  ने ये स्पष्ट कर दिया है कि देवेंद्र यादव की इमेज बिल्डिंग से बी जे पी को कोई फर्क पड़ता नहीं दिख रहा है लेकिन छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के बड़े नेता जरूर सांसत में आ गए हैं , कल शाम जेल से बहार कॉंग्रेस के चिन्हित नेताओं में प्रदेश महामंत्री मलकीत सिंह गैदू , रायपुर के पूर्व महापौर प्रमोद दुबे और दुर्ग के पूर्व विधायक अरुण वोरा के अलावा प्रदेश का कोई भी वरिष्ठ नेता मसलन प्रदेश कॉंग्रेस अध्यक्ष , कॉंग्रेस विधायक दल के नेता या फिर कोई और कॉंग्रेस विधायक अथवा सांसद किसी की उपस्थिति नहीं रही इससे ये तो स्पष्ट होता है कि कॉंग्रेस में देवेंद्र यादव का ग्राफ जिस तेजी से बढ़ रहा है उससे बी जे पी नहीं बल्कि कॉंग्रेस के बड़े नेता ज्यादा परेशान हैं बहुत ही कम अंतर से भिलाई विधान सभा से चुनाव जीतने वाले देवेंद्र यादव का बिलासपुर से लोकसभा की टिकिट ले आना कांग्रेस हाई कमान तक उनकी पहुँच का प्रमाण है और यही प्रदेश कॉंग्रेस के बड़े नेताओं की बेचैनी का सबब भी है। दरअसल एक भीषण संक्रमण काल से गुजर रही कॉंग्रेस पार्टी में अब नेतृत्व को लेकर स्थापित नेताओं और नई पीढ़ी के मध्य जबरदस्त टकराव की स्थिति निर्मित हो गई है और युवा पीढ़ी भी अब ताल ठोंक कर वरिष्ठों को चुनौती देने के मूड में दिख रही है कॉंग्रेस की गुटिय राजनीती में समीकरण भी तेजी से बदल रहे हैं कल तक प्रदेश में कॉंग्रेस के सर्वमान्य नेता भूपेश बघेल की स्थिति अब पहले जैसी नहीं रही प्रदेश के कई दिग्गजों से उनके नेतृत्व को मिल रही चुनौतियों के जवाब स्वरुप ही भूपेश बघेल द्वारा कॉंग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव का पद प्राप्त किया गया है लेकिन उनको पद मिलते ही देवेंद्र यादव की रिहाई ने चाय के प्याले में तूफ़ान उठा दिया है छत्तीसगढ़ से कॉंग्रेस के सबसे बड़े नेता रहे स्व मोतीलाल वोरा के पुत्र अरुण वोरा को जिस तरह भूपेश बघेल के करीबी नेताओं राजेश यादव और राजेंद्र साहू ने परेशान किया है उससे पूरा शहर वाकिफ है किन्तु गौरतलब बात ये है कि कल जो देवेंद्र यादव भूपेश बघेल के ख़ास करीबियों में थे उनकी अगुआई के लिए भूपेश बघेल  करीबी नेताओं में से कोई नहीं गया अलबत्ता उनके धूर विरोधी वोरा वहां डटे रहे इस घटनाक्रम से ये तो स्पष्ट  कि अब देवेंद्र विश्वामित्र हो गए हैं और कॉंग्रेस के बड़े नेता देवेंद्र हो गए हैं।  

 बीजेपी मुक़दमे के अंतिम फैसले तक देवेंद्र यादव को निर्दोष नहीं मानती बी जे पी नेताओं की मानें तो देवेंद्र यादव का प्रभाव उनकी अपनी पार्टी में चाहे जितना भी बढ़ जाए लेकिन उनके भीड़ तंत्र और आक्रामक मुद्रा आम से जनमानस पर कोई ख़ास प्रभाव नहीं पड़ सकता ।कल देवेंद्र यादव की रिहाई पर प्रदेश के दोनों उप मुख्यमंत्रियों का जैसा बयान आया उससे ये स्पष्ट है कि देवेंद्र यादव की रिहाई भारतीय जनता पार्टी के लिए किसी चिंता का विषय नहीं है। 

By editor