कोशिश:एक कविता
कोशिश थी भारत की; कश्मीर में शांति लाने की।
विकास की पटरी पर कश्मीर को दौड़ाने की।।
विकास का आधार बना पर्यटन,
सारे देश से आने लगे जन-जन।
कश्मीरियों को होने लगा धनार्जन,
हर्षित था कश्मीर का आम जन।
यही बात चुभ गयी पाक के आकाओं को,
और कर दी साज़िश निर्दोषों और निहत्थों की हत्या की।
क्योंकि वे नहीं चाहते कश्मीरी बनें स्वावलंबी,
वे नहीं चाहते उनकी चतुर्दिक उन्नति,
वे चाहते हैं केवल उनकी दुर्गति।
ताकि वे कश्मीर में फैलाते रहें आतंक।
किंतु उन्हें नहीं मालूम कि भारत नहीं उनकी तरह रंक,
मिटाकर ही रहेगा अपने देश से ऐसे कलंक।
घुस जाएँ वे चाहे किसी भी बिल में,
निकाल कर मारेंगे गोली उनके दिल में।
छेद डालेंगे उनके वे हर सीनें,
जो बढ़ेंगे कश्मीर के आँगन में।
जय हिन्द।
रचनाकार :रमेश चंद्र द्विवेदी
