कश्मीर में हिंदुओं का निर्मम नरसंहार ।आतंकवाद नहीं इस्लामिक जेहाद है ये !पर्यटक कश्मीर जाना बंद करें !

कल शाम कश्मीर के पहलगाम में हुए नृशंस नरसंहार की घटना को एक आतंकवादी घटना के रूप में  मीडिया ने सुर्ख़ियों रखा है और कड़े शब्दों में घटना की नींदा भी की गई है लेकिन RCN इस घटना को आतंकवादी घटना कहने या मानने से इंकार करता है। और इस देश के प्रत्येक आम जन और मीडिया से निवेदन है कि ऐसी घटनाओं को आतंकवादी घटना कह कर इनके कुत्सित उद्देश्यों और नीच विचारों पर पर्दा डालना बंद करें।  जेहाद नामक मजहबी उन्माद से ग्रस्त नर पिशाचों के इस्लामिक जेहाद को ,जेहादी नरसंहार को आतंवादी घटना मत कहिये इस संसार में सिर्फ अल्लाह ही पूज्य है और जो उसे नहीं मानता वो कफीर है , और जो काफिर है उसका क़त्ल जायज़ है।  ऐसी वहशी मानसिकता को मात्र आतंकवाद मत कहिये। मजहब पूछ कर , कलमा पढ़वा कर , कपडे उतार कर खतना जांच कर हिन्दुओं का नरसंहार मात्र आतंवादी घटना नहीं है। कल की इस घटना के बाद दुष्यंत की पंक्तियाँ प्रासंगिक हो गई हैं ,
हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।
आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,
शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए।
हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में,
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए।
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।

1990 में हिन्दू को घरों से निकाल कर मारा कटा लूटा खसोटा गे , महिलाओं की आबरू लूटी नृसंश नरसंहार हुआ कश्मीर के कुल एक लाख बीस हज़ार हिन्दुओं में से एक लाख को कश्मीर छोड़ना पड़ा उसके बाद से लगातार  कश्मीर में ही अनंत नाग में 36 हिन्दुओं  की हत्या हुई , पुलवामा में हिन्दुओं की हत्या ,चन्दन वाड़ी में 11 हिन्दुओं की हत्या ,नूनवाल में 36 हिन्दुओं की हत्या , विधान मंडल में 36 हिन्दुओं की हत्या , शेष नाग में 13 हिन्दुओं की हत्या ,हाइवे के किनारे 11 हिन्दुओं की हत्या , फिर पुलवामा में 13 हिन्दुओं की हत्या , इसके बाद पुलवामा में भातीय सेना के 40 जवानों के हत्या इनमे से कोई भी घटना मात्र आतंकवादी घटना कहलाने के लायक नहीं है क्योंकि इस देश के सारे कथित बुद्धिजीवी , सेक्युलर , लिबरल , वामपंथी और कॉंग्रेसी उदारवादी और दरियादिल चिंतकों का मानना है कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता यदि ये सच है तो फिर ये भी सच है के घटनाएं आतंकवादी घटनाएं नहीं हैं क्योंकि इन जेहादियों का धर्म है ! इस जेहाद को जेहाद ना कहने वालों के लिये  ही दुष्यंत ने लिखा है , 

मत कहो, आकाश में कुहरा घना है,
यह किसी की व्यक्तिगत आलोचना है ।
सूर्य हमने भी नहीं देखा सुबह से,
क्या करोगे, सूर्य का क्या देखना है ।
इस सड़क पर इस क़दर कीचड़ बिछी है,
हर किसी का पाँव घुटनों तक सना है !

ये इस संसार की सबसे क्रूर मजहबी विचारधारा से उपजा इस्लामिक जेहाद है तो इसे इस्लामिक जेहाद कहने की हिम्मत करिये क्योंकि यही अधिकतम है जो शायद आप कर सकते हैं। इससे ज्यादा सोचने और करने की क्षमता हिन्दू समाज में है भी नहीं वर्ना जिस दिन हिन्दू समाज धार्मिक आधार पर इनका सामजिक व्यापारिक आर्थिक बहिष्कार  कर ले बिना संघर्ष के एक हाथ उठाए बिना बिना कोसे बिना गरियाये इनके सारे जेहाद को एक घंटे में निपटने की क्षमता रखता है लेकिन समस्या कहाँ है ? इनमे कट्टर धार्मिक विचारों से उपजी अटूट एकता है और जात पात क्षेत्र सम्प्रदाय में बंटे हिन्दुओं में विखंडन ही विखंडन है। राम को मानने वालों कभी समय मिले तो जरा रामायण पढ़ना , रावण जब अंतिम साँसे ले रहा था तो प्रभु श्री राम ने अपने अनुज लक्ष्मण को रावण के पास नीति का ज्ञान लेने भेजा था हमारी संस्कृति ने हमें सिखाया है किसी नीच अधम में यदि एक भी अच्छाई है तो उसे भी ग्रहण करना चाहिए आज रामायण की मानकर हिन्दुओं को मुसलमानों से अपने धर्म के प्रति निष्ठा पालन सीखना चाहिए वो मरते मर जायेगा लेकिन झटके का मांस नहीं खायेगा और ये लाइन लगा कर हलाल का मांस खरीदेंगे अरे अपने धर्म रक्षण के लिए शस्त्र नहीं उठा सकते , अपने हाथ नहीं उठा सकते ,  खुलकर आवाज नहीं उठा सकते  , कायरों तो कम से कम इनसे मांस और फल खरीदना ही बंद कर दो। कहीं तो कैसी भी तरह तो अपने जमीर को जगाओ।  
काफी साल पहले मैंने एक कविता लिखी थी ऐसा लगता है आज ही के लिए लिखी गई थी इसे सुनिये भी और थोड़ा गुनिये भी।  

पुरखों ने तेरे शीश बोए , सींचा जिस धरती को खून पसीनों से ,
लहूलुहान है आज वो धरती , जेहादी भेड़ियों के नाखूनों से ,
झेलम चिनाब बहता बारूद , बहता लिद्दर में हलाहल है ,
उरी पुलवामा अनंतनाग और कारगिल तक कोलाहल है ,
अमरनाथ  श्रीनगर  गुलमर्ग और पहलगाँव  में  दावानल है ,
लश्कर इरादों से  , विस्फोटों से जिहादों से मेरा भारत घायल है,
माँ भारती की अश्रु धारा से अभिषेक कराने आया हूँ ,
भारत का हर हिन्दू जगे  , मैं तुझे  जगाने आया हूँ ! 1

बिता दी कई सदियां तूने श्वेत कपोत उड़ाने में ,
बिच्छू को सहलाने में नागों को दूध पिलाने में,
किन्तु भेड़ियों को  शान्ति घोष कब समझ आता है ?
वन में तो विनम्रता को दुर्बलता ही समझ जाता है,
तेरे अंदर चक्रधर जागे , सोने दे बंशीधर गोपाल को ,
सौ की हुई गिनती पूरी बता दे अब शिशुपाल को ,
कौन है तू क्या है तेरी पहचान , बतलाने आया हूँ ,
भारत का हर हिन्दू जगे , मैं तुझे  जगाने आया हूँ ! 2

तपोभूमि में भगीरथ तू ,समरभूमि में परशुराम है
रण में वधा रावण जिसने तेरे अंदर वो राम है ,
बांहे उखाड़ी कंस की जिसने , बसता तुझमे वो श्याम है ,
हिमालय की तुझमे दृढ़ता , तुझमे गंगा से प्राण हैं ।
तू पवन पुत्र महावीर मैं जामवंत चेतना लौटने आया हूँ ।3
भारत का हर हिन्दू जागे , मैं तुझे जगाने आया हूँ ।

भूषण , चंद  और दिनकर का आह्वान हो ,
समस्त असुर दुष्ट जेहादियों पर अब  संधान हो ,
हो अधर्म का क्षय सुनिश्चित ,  धर्म का अब उत्थान हो ,
धर्माधर्म संग्राम की खातिर ,  पुनःवज्र निर्माण हो ,
गला दो स्वयं की अस्थियां ,  तुम दधीचि की संतान हो !
तेरे बलिदान का अमर अतीत ,  तुझे बताने आया हूँ ,
भारत का हर हिन्दू जागे , मैं तुझे  जगाने आया हूँ ! 04

जागे डमरूधर भीषण तांडव अब की बार हो ,
हर हर बम बम का चहुँ और घोर उच्चार हो ,
जागे खप्पर रणचण्डी का नरमुंडों का हार हो ,
हो उनमत्त काली नाचे रक्त बीज संहार हो ,
तेरे भीतर के सुप्त कपाली को उठाने आया हूँ ,
भारत का हर हिन्दू जागे , मैं तुझे  जगाने आया हूँ !05

लड़ना है तुझे अब युद्ध नया ,  बैरी घर के अंदर है ,
कुंआ ताल तलैय्या नहीं अब ये तो पूरा समंदर है ,
दोनों हाथों शस्त्र उठा , पूरा$$ अब प्रण करना होगा ,
वो रहे या तू रहे !  अब ऐसा भीषण रण करना होगा !!
 पांचजन्य , पिनाक ,गांडीव , चक्र सुदर्शन  सजा लाया हूँ ,
भारत का हर हिन्दू जागे , मैं तुझे  जगाने आया हूँ ! 06

सौगंध उठा मिटने न देगा तू अपने पुरखों की थाती को ,
प्रतिकार करेगा और लहू पियेगा , चीर भेड़ियों की छाती को ,
उठ रण सिंह नाद कर ! और बता दे श्वान प्रजाति को ,
भूला नहीं है तू अभी , शीश कटाने की परिपाटी को ,
कर दे केसरिया केरल बंगाल और काश्मीर की घाटी को ,
और फिर कर दे केसरिया ,  पूरे आर्यावर्त की माटी को !!
तेरे उन्नत ललाट पे , केसरिया तिलक सजाने आया हूँ !,
भारत का हर हिन्दू जागे , मैं तुझे  जगाने आया हूँ ! 07

By editor