बेटे-बहुओं की प्रताड़ना से टूट रहे रिश्ते, संवाद से जोड़ने की कोशिश

जिन माता-पिता ने
अपने बच्चों को चलना सिखाया,
पढ़ाया-लिखाया
और अपने सपनों से बड़ा
उनका भविष्य देखा,
आज वही बुजुर्ग
बुढ़ापे में
सम्मान नहीं,
बल्कि अपमान और प्रताड़ना झेलने को मजबूर हैं।

यह पीड़ा अब
केवल महानगरों तक सीमित नहीं रही,
बल्कि
छोटे शहरों और कस्बों की
चुप दीवारों के भीतर भी
खामोशी से पल रही है।
और इसी पीड़ा को लेकर
आज कई बुजुर्ग
न्याय की उम्मीद लेकर भिलाई महिला थाना पहुंचे।

ऐसे ही बुजुर्गों को न्याय दिलाने
और परिवार में उनका सम्मान लौटाने के उद्देश्य से
भिलाई महिला थाना में पहली बार बुजुर्गों की काउंसिलिंग शुरू की गई है।
छत्तीसगढ़ में यह
अपनी तरह की पहली पहल मानी जा रही है,
जिसमें अब तक
17 आवेदन सामने आ चुके हैं।

इन आवेदनों का
सबसे दुखद और चौंकाने वाला पहलू यह है कि
यहां प्रताड़ना
किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा नहीं,
बल्कि
उन्हीं बेटों और बहुओं द्वारा दी जा रही है,
जिनके लिए माता-पिता ने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।

कहीं मां-बाप को
घर से बाहर निकाल दिया गया,
तो कहीं
उन्हें भोजन, दवा
और सम्मान तक के लिए तरसाया जा रहा है।

आज
एडिशनल एसपी विजय अग्रवाल की उपस्थिति में
पांच सदस्यीय टीम ने बुजुर्गों की काउंसिलिंग शुरू की।

डीएसपी भारती मरकाम ने बताया कि
महिला थाना में नियुक्त काउंसलर
इन मामलों को
पूरी संवेदनशीलता के साथ सुन रहे हैं
और समाधान की दिशा में प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि
इस पहल का उद्देश्य
केवल कानूनी कार्रवाई करना नहीं है,
बल्कि
परिवारों के बीच संवाद स्थापित कर
टूटते रिश्तों को दोबारा जोड़ना है।

जहां संभव हो,
वहां समझाइश और परामर्श के माध्यम से
बच्चों को
उनकी जिम्मेदारियों और नैतिक कर्तव्यों का
अहसास कराया जा रहा है।

यह पहल
उन बुजुर्गों के लिए
एक नई उम्मीद बनकर सामने आई है,
जो अपने ही घरों में
खुद को असहाय और अकेला महसूस कर रहे थे।

By editor