सुरक्षा मानकों की अनदेखी से फिर हुआ ब्लास्ट: चार झुलसे, 2 की हालत गंभीर, मां मनी आयरन एंड इस्पात कंपनी के ब्लास्ट फर्नेस में हुआ हादसा

बुधवार-गुरुवार की रात पूंजीपथरा औद्योगिक पार्क स्थित मां मनी आयरन एंड इस्पात कम्पनी में ब्लास्ट फर्नेस में हुए हादसे में चार श्रमिक झुलस गए। इसमें दो की हालत बेहद नाजुक है। 70 फीसदी से अधिक बर्न के बाद दोनों को बाहर रेफर किया गया है। ब्लास्ट इतना तेज था कि पास खड़े क्रेन ऑपरेटर सहित चार श्रमिक लावा की चपेट में आ गए।

झुलसे श्रमिकों में समस्तीपुर बिहार के अनुज कुमार (35), मुजफ्फरपुर के रामानंद साहनी (40), बोकारो झारखंड के संजय श्रीवास्तव (52) और सुधीर कुमार महतो शामिल हैं। अनुज और रामानंद को 70% से अधिक जलने के कारण रायपुर रेफर किया गया है, जबकि अन्य का इलाज जिंदल हॉस्पिटल में जारी है।

जिले के उद्योगों में लगातार हो रहे हादसे इस ओर इशारा कर रहे हैं कि सुरक्षा मानकों को लेकर न तो उद्योग प्रबंधन गंभीर है और न ही औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग इस पर सख्ती दिखा रहा है। यह कोई पहली घटना नहीं है। इसी महीने 5 मई को जिंदल इंडस्ट्रियल पार्क स्थित शिवा स्टील एंड एलॉयज में भी फर्नेस ब्लास्ट हुआ था, जिसमें श्रमिक की मौत हो गई थी।

मात्र 11 दिन बाद फिर से वैसी ही घटना, यह दर्शाता है कि ना तो जांच से कोई सबक लिया गया और न ही सुधार के प्रयास किए गए। औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। विभाग के अनुसार, जनवरी से अब तक 24 प्रकरण दर्ज किए गए हैं, जिनमें सुरक्षा उपकरणों की अनदेखी और हादसे शामिल हैं।

लेकिन कार्रवाई सिर्फ शो-कॉज नोटिस और कोर्ट में पेशी तक सीमित है। पीडितों को मुआवजा वर्कमैन सेटलमेंट या ईएसआईसी के माध्यम से भेजने की औपचारिकता निभा ली जाती है। उद्योगों में नियमित मेंटनेंस हो रहा है, प्रशिक्षित कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है या नहीं इसकी जांच नहीं होती है। हादसे के बाद अफसर मौके पर पहुंचते हैं और कार्रवाई होती है, हादसा टालने के उपाय नहीं किए जाते हैं।

2024 में 35 हादसों में 22 लोगों की मौत

जिले में उद्योगों हो रहे हादसे से काम करने वाले श्रमिकों में दहशत का माहौल है। पिछले चार सालों में जिले में 95 औद्योगिक हादसों में 66 श्रमिकों की मौत और 50 घायल हो चुके हैं। अकेले 2024 में 35 हादसों में 22 मौतें हुईं। यह आंकड़ा दर्शता है जिले में स्थापित उद्योगों के सुरक्षा नियमों का पालन कैसे किया जा रहा है।

फिलहाल औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के अनुसार हेड ऑफिस से अब प्लांटों की जांच करने लिस्ट बनाया गया है। जो समय–समय पर उद्योगों में जाकर जांच की जाती है। जिसमें बिलासपुर संभाग के विभाग के अधिकारियों को नाम शामिल है। अब पहले की तरह रूटीन जांच के लिए जिले के विभाग नहीं जाता है।

5 महीनों में उद्योगों के खिलाफ 24 प्रकरण दर्ज
उद्योग स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के अनुसार जनवरी से अब तक उद्योगों के खिलाफ 24 प्रकरण दर्ज कर कोर्ट में भेजे गए हैं। जिसमें प्लांटों की शिकायत, जांच, सुरक्षा उपकरण की अनदेखी सहित हादसे भी शामिल है। वहीं बीते साल 50 प्रकरण बनाए गए थे। हादसे के बाद जांच तो होती है लेकिन केवल शोकॉज नोटिस जारी कर प्रकरण दर्ज कर मामला दर्ज लिया जाता है। वहीं पीड़ित का मुआवजा के लिए भी वर्कमेन सेटलमेंट या फिर ईएसआईसी के लिए भेज दिया जाता है।

प्लांट के ब्लास्ट फर्नेस पर प्रतिबंध, जांच जारी
मां मनी आयरन एंड स्टील प्लांट के ब्लास्ट फर्नेस फटा है। हादसे के बाद मौके पर जांच करने गए थे। फर्नेस के हीट रनिंग मार्क कटा है। दरअसल जहां से मैटल बाहर निकलता है उसे नीचे क्वाइल लगा रहता जिससे करंट आता है। उसी के रास्ते पानी भी जाता है। उसके कॉन्टैक्ट में आया है नीचे के 5–6 क्वाइल में तो क्वाइल खराब हुई है पानी अंदर आया जिससे ब्लास्ट हुआ है। जिससे गर्म मेटल पूरे क्षेत्र में बिखर गया है। तकनीकी खराबी को सुधार कर रहे 4 लोग झुलस गए है।

By editor