70 तक के दशकों की अधिकतर हिंदी फिल्मों के ग्रामीण परिवेश में मुख्य खलनायक गाँव का सूदखोर महाजन होता था और ये फ़िल्मी कहानी मात्र नहीं थी सचमुच ग्रामीण क्षेत्रों में सूदखोरी के दम पर ही न जाने कितने लोग सैकड़ों एकड़ जमीन के मालिक बन गए और न जाने कितने भूमिहीन हो गए ! यदि छत्तीसगढ़  की बात करें तो सन 2000 में नया राज्य बनने के बाद जिला केंद्रीय सहकारी बैंक और सहकारी समितियों से किसानों को जो ऋण सुविधाएं सुलभ हुई उसके बाद ग्रामीण अंचल में व्यवस्थाएं काफी बदली , किसान संपन्न हुए और सूदखोरी के चंगुल से मुक्त भी हुए लेकिन समाज से सूदखोरी का अभिशाप ख़त्म नहीं हुआ सूदखोरी की ये  ग्रामीण व्यवस्था अब गावों से निकल कर शहरों में अपने पैर  प्रसार चुकी है।  हाल ही में रायपुर पुलिस ने सूदखोरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई कर रायपुर के कुख्यात सूदखोर तोमर बंधुओं को घेरे में लिया ये सचमुच बड़े आश्चर्य का विषय है कि कुछ वर्ष पहले अंडे का ठेला लगाने वाले दोनों भाई  करोड़ों में खेल रहे थे ,पिछले दो दिनों से राजधानी रायपुर में वीरेंद्र उर्फ़ रूबी तोमर के गिरफ़्तारी जुलुस की खबर मीडिया की सुर्ख़ियों पर है उल्लेखनीय है कि आज से 4 माह पूर्व रायपुर पुलिस द्वारा कुख्यात सूदखोर तोमर बंधुओं के खिलाफ बड़ी कारवाई की गई थी जिसके बाद दोनों भाई फरार थे जिनमे से एक को रायपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया और रायपुर शहर में उसका जुलूस भी निकाला गया जुलूस में वीरेंदर तोमर का लंगड़ा कर चलना , लड़खड़ा कर गिरना और फिर बेहोश होने का अभिनय काबिले तारीफ़ था। रायपुर पुलिस का कॉलर भी ऊंचा हो गया एक कुख्यात वांटेड अपराधी की मुस्तैदी से घेरा बंदी कर गिरफ्तार कर किया गया।
लेकिन इस पूरे प्रकरण में जो सबसे अहम् प्रश्न निकल कर आता है वो ये है कि तोमर बंधुओं पर पुलिसिया कार्रवाई सचमुच छत्तीसगढ़ में सूदखोर माफियाओं पर बड़ी कार्रवाई का आगाज़ है या फिर इन पर हुई कार्रवाई किसी बड़े रसूखदार से व्यावसायिक रंजिश का परिणाम है।  आज से चार – पांच माह पूर्व जब रायपुर पुलिस ने तोमर बंधुओं पर ताबड़ तोड़ कार्रवाई की तो पूरी मीडिया ने उसे सूदखोरी के विरुद्ध पुलिसया कार्रवाई के रूप में प्रासारित किया। लेकिन जब पुलिस की कार्रवाई तोमर बंधुओं तक ही सीमित रही और अन्य किसी बाहुबली सूदखोर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तब ये स्पष्ट हो गया कि तोमर बन्दुओं पर रायपुर पुलिस की कठोर कार्रवाई के पीछे कारण सूदखोरी का अवैध व्यापार तो नहीं है। दरअसल रायपुर में जमीनों के कारोबार में जुड़े भू माफियाओं में दो प्रकार के लोग हैं एक तो तोमर बंधू जैसे बाहुबली और दुसरे  कुछ इतने बड़े रसूखदार लोग हैं जिनकी पहुंच राजनीती और अफसरशाही के सर्वोच्च शिखर तक है ऐसे ही किसी बड़े रसूखदार आदमी से किसी लैंड डील को लेकर तोमर बंधुओं का आमना सामना हो गया और बड़े रसूखदार से भिड़ना तोमर बंधुओं को भारी पड़ गया। रसूखदार के प्रभाव से इनपर कार्रवाई तो की जानी थी लेकिन लैंड डील को लेकर कोई कानूनी मामला बनता नहीं दिख रहा था इसलिए तोमर बन्दुओं की कमज़ोर नब्ज़ , ‘ सूदखोरी ‘ को टारगेट किया गया और बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया।          इस पूरी घटना से समाज के दबे कुचले तबके में एक उम्मीद की किरण जगी थी की अब समाज में रसूखदार सुखी लालाओं पर सरकार सख्त हो गई है और अब इन रसूखदार सूदखोरों से दबे कुचले गरीब तबके को राहत मिलेगी लेकिन पिछले चार महीनों में पूरे प्रदेश में पुलिस द्वारा कहीं किसी भी अन्य सूदखोर पर कोई कार्रवाई न करना ये स्पष्ट बताता है कि पुलिस का लक्ष्य समाज को सूदखोरी से मुक्ति दिलाना नहीं होकर मात्र तोमर बंधुओं को निपटना ही था। 17 जून  2025 में ही मैंने राष्ट्रीय चेतना न्यूज़ पर सूदखोरी को लेकर एक ग्राउंड रिपोर्ट के साथ एक विश्लेषण प्रस्तुत किया था जिसमें जिसमें मणि बताया था कि भिलाई शहर में सूदखोरों का बड़ा नेटवर्क सक्रीय है इस कारोबार में व्यापारी , नेता , बी एस पी कर्मचारी , सहकारी साख समितियों के पदाधिकारी और कर्मचारी और अन्य कई प्रभावशाली लोग शामिल हैं और साथ ही साथ भिलाई में रसूखदार सूदखोरों द्वारा बाहूबल का खुला प्रयोग करते हुए उधार की रकम पर दस प्रतिशत मासिक ब्याज वसूलने के तथ्य सामने रखे थे किन्तु आज तक भिलाई पुलिस द्वारा सूदखोरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। देखिये 17 जून 2025 की उस कड़ी के कुछ अंश ——          आइये समझते हैं ये अपराध शहरों में कैसे संचालित होते हैं दरअसल ये सूदखोर पूरे देश में एक सामानांतर अर्थ व्यवस्था चला रहे हैं जिससे कला धन तूफानी गति से बढ़ रहा है आप समझने की कोशिश करें ब्याज पर चलने वाला पैसा नगद यानि की अनएकॉउंटेड पैसा होता है जो निश्चित रूप से काला धन है और इन सूदखोरों की ब्याज दरें भी ऐसी होती हैं कि आम आदमी इसकी कल्पना भी नहीं कर सकता । क्या आप सोच सकते हैं कि ये सूदखोर 5 % महीने से ले कर 10 % प्रतिमाह  तक की ब्याज दर पर पैसा चला कर कहते गरीब व्यापारियों का भरपूर शोषण कर रहे हैं।  इतना ही नहीं  वसूली के लिए गुंडे भी पाल रहें और शहर में अपराध को बढ़ावा भी दे रहे हैं।  

भिलाई शहर में सूदखोरों का बड़ा नेटवर्क सक्रीय है इस कारोबार में व्यापारी , नेता , बी एस पी कर्मचारी , सहकारी साख समितियों के पदाधिकारी और कर्मचारी और अन्य कई प्रभावशाली लोग शामिल हैं इस विषय पर हमारे रिपोर्टर ने कुछ खुदरा व्यापारियों से बात की देखिये आर सी एन रिपोर्टर संजय दुबे की एक रिपोर्ट।  
इससे ये स्पष्ट रूप से प्रमाणित होता है कि फिलहाल सूदखोरी के धंधे में बाहुबल के दम पर मनमाना ब्याज वसूलने वाले अपराधियों को शासन से कोई खतरा नहीं है और ब्याज के बोझ से जिनके घर बार बिक जा रहे हैं सूदखोरों के आतंक से जो आत्महत्या कर ले रहे हैं ऐसे गरीब लोगों को फिलहाल कोई राहत नहीं है     लेकिन आर सी एन की टीम इस विषय पर निरंतर शोध कर रही है अगली कड़ी में आपको बताएंगे शहर के कुछ बड़े रसूखदार सूदखोरों के नाम और उनकी कहानी

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