भिलाई के लिए यह एक गौरवपूर्ण और भावुक कर देने वाला क्षण है,
जब शहर की दो होनहार प्रतिभाओं को
देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद से सम्मान और पहचान मिली है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने
भिलाई की छात्रा कविता साहू
और जन्म से दोनों हाथों से दिव्यांग कलाकार गौकरण पाटिल को
26 जनवरी को राष्ट्रपति भवन में आयोजित
विशेष चाय कार्यक्रम में आमंत्रित किया है।
इस कार्यक्रम के लिए दोनों के आने-जाने की पूरी व्यवस्था शासन द्वारा की गई है।
छात्रा कविता साहू का चयन
उनके द्वारा तैयार किए गए रोबोटिक नवाचार आइडिया के आधार पर हुआ है।
वैशाली नगर स्थित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में अध्ययनरत
और शास्त्री नगर कैंप की निवासी कविता ने
अपने स्कूल की अटल टिंकरिंग लैब में यह अभिनव रोबोटिक आइडिया तैयार किया था।
कविता ने बताया कि इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में
देशभर से करीब डेढ़ लाख आइडिया प्राप्त हुए थे।
कड़ी जांच प्रक्रिया के बाद पहले 1000, फिर 100
और अंततः सिर्फ 13 प्रतिभागियों का चयन हुआ।
इस कठिन प्रतिस्पर्धा में कविता ने
देश के टॉप-10 नवाचार विद्यार्थियों में अपनी जगह बनाई।
गुरुवार को उन्हें राष्ट्रपति भवन से आमंत्रण पत्र प्राप्त हुआ,
जिसमें 26 जनवरी को आयोजित विशेष चाय कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बुलाया गया है।
कविता और उनका परिवार इस उपलब्धि से बेहद खुश है।
कविता ने अपनी सफलता का श्रेय
अपनी शिक्षिका रितु हांडां को दिया है।
वहीं दूसरी ओर,
भिलाई के रिसाली सेक्टर में रहने वाले
गौकरण पाटिल की कहानी
संघर्ष, आत्मविश्वास और प्रेरणा की मिसाल है।
जन्म से ही दोनों हाथों से दिव्यांग
और बोलने व सुनने में असमर्थ गौकरण
ने कभी भी अपनी कमजोरियों को
अपनी राह का रोड़ा नहीं बनने दिया।
गौकरण पाटिल अपने पैरों और मुंह की मदद से
अद्भुत चित्र बनाते हैं।
उनकी पेंटिंग्स देखकर लोग हैरान रह जाते हैं।
आज वे रायपुर स्थित कोपाल वाणी स्कूल में
ड्राइंग टीचर के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।
वे बच्चों को सिर्फ चित्रकला ही नहीं,
बल्कि संघर्ष के बीच
आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देते हैं।
उनकी इसी अनोखी प्रतिभा और जज्बे ने
राष्ट्रपति का ध्यान आकर्षित किया।
जब राष्ट्रपति को
गौकरण पाटिल की उपलब्धियों की जानकारी मिली,
तो वे उनसे बेहद प्रभावित हुईं
और उन्हें राष्ट्रपति भवन में
चाय पर आमंत्रित किया गया।
भिलाई की इन दो प्रतिभाओं का सम्मान
न सिर्फ उनके लिए,
बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है।
यह कहानी बताती है कि
प्रतिभा और मेहनत के आगे
कोई भी सीमा टिक नहीं सकती।

