विधायक देवेन्द्र यादव के सत्याग्रह को बताया राजनीतिक ढोंग

बीएसपी टाउनशिप में रिटेंशन और लाइसेंस स्कीम की बढ़ी हुई दरों, दुकानों के लीज नवीनीकरण, साथ ही स्कूल और अस्पतालों के निजीकरण को लेकर पहले से ही माहौल गर्म है। अब इन मुद्दों पर राजनीतिक और सामाजिक टकराव भी सामने आने लगा है।

इसी बीच भिलाई विधायक देवेन्द्र यादव के खिलाफ बीएसपी के सेवानिवृत्त कर्मचारी खुलकर मैदान में उतर आए हैं। पिछले तीन दिनों से विधायक देवेन्द्र यादव इन मुद्दों को लेकर उपवास पर बैठकर सत्याग्रह कर रहे हैं, लेकिन रिटायर्ड कर्मियों ने उनके इस आंदोलन को राजनीतिक ढोंग करार दिया है।

बीएसपी सेवानिवृत्त कार्मिक कल्याण संघ का कहना है कि विधायक देवेन्द्र यादव भिलाई को बचाने की बजाय उसे गर्त में धकेलने का काम कर रहे हैं। संघ के वरिष्ठ सदस्यों और बुजुर्ग कर्मियों का आरोप है कि जब सांसद विजय बघेल और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पांडेय पहले ही बीएसपी प्रबंधन से बातचीत कर 10 दिन का अल्टीमेटम दे चुके हैं, तब प्रबंधन के निर्णय से पहले इस तरह का सत्याग्रह केवल श्रेय लेने की राजनीति है।

संघ के अध्यक्ष सुरेशचंद ने साफ कहा कि अगर 10 दिन की समय-सीमा पूरी होने के बाद भी प्रबंधन की ओर से कोई ठोस फैसला नहीं आता और तब विधायक सत्याग्रह करते, तो उसे जनहित का आंदोलन माना जाता। लेकिन उन्हें पहले से अंदाजा है कि 10 दिनों के भीतर प्रबंधन की ओर से कोई न कोई निर्णय आएगा, इसी वजह से यह पूरा मामला प्रोपोगंडा है।

इधर सिविक सेंटर स्थित पायोनियर मॉन्यूमेंट पार्क में सेवानिवृत्त कर्मियों ने बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा की। संघ ने ऐलान किया कि 23 दिसंबर को प्रबंधन को दिया गया अल्टीमेटम खत्म होने के बाद वे दोबारा सांसद से मुलाकात कर अगली कार्ययोजना तय करेंगे।

कुल मिलाकर, बीएसपी टाउनशिप से जुड़े मुद्दों पर अब सत्याग्रह बनाम रणनीति की सियासत तेज होती नजर आ रही है।

By editor