1980 के दशक के अंतिम दो वर्ष ये वी पी सिंह के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन और देश के युवाओं के बागी होने का दौर था , वी पी सिंह की आंधी में देश की पूरी तरुणाई बह निकली थी। विद्या चरण शुक्ल के वी पी सिंह के साथ जुड़ने से ये आंधी छत्तीसगढ़ में और प्रबल है गई अपनी आक्रामक शैली की वजह से विद्या भैय्या हमेशा ही युवओं के चहेते नेता रहे और उन्होंने भी आजीवन युवाओं को सबसे ज्यादा तरजीह दी। 1989 में मैं शासकीय विज्ञान महाविद्यालय दुर्ग का छात्र था और मेरी छवि एक तेज तर्रार छात्र नेता और प्रखर वक्त की थी छात्र आन्दोलनों में उग्र तेवर के साथ प्रथम पंक्ति का लाठीखोर छात्र नेता था। अंतर्मन से घोर दक्षिण पंथी मानसिकता का होते हुए भी समाजवादी नेता प्रदीप चौबे के प्रभाव में जनता दल से जुड़ गया और प्रदीप चौबे जी के माध्यम से ही विद्या भैय्या के संपर्क में आया और उनके चमत्कारी व्यक्तित्व के गुरुत्वाकर्षण में ऐसा फंसा कि उनके अंतिम समय तक उनके साये की उनके पीछे लगा रहा जनता दल फिर कांग्रेस फिर रा क पा फिर भा ज पा फिर कांग्रेस भैय्या ने जाने कितने दरवाजे दिखाए और मैं देखता रहा। काफी लम्बे समय तक भीड़ में नारे लगाने वाले अंतिम पंक्ति के कार्यकर्ता के रूप में कार्य करने के बाद 2000 में छत्तीसगढ़ के निर्माण के बाद भैय्या से बहुत निकट आने का सौभाग्य मिला रा क पा के आंदोलनों ने मुझे भी विद्या भैय्या के चहेतों की सूची में शामिल कर दिया। 2008 के विधान सभा चुनाव में भिलाई विधान सभा से कांग्रेस की टिकिट के लिए प्रदेश कांग्रेस कमिटी के पैनल में विद्या भैय्या की अनुशंसा पर मेरा नाम डाला गया इतना ही नहीं भैय्या ने आखरी समय तक मेरी टिकिट के लिए एड़ी चोटी का प्रयास भी किया।
अपने कार्यकर्ताओं के लिए किसी भी सीमा तक जा कर काम करना विद्या भैय्या का आंतरिक गुण था , उनसे जुड़े बहुत से संस्मरण हैं हमारे लिए कुछ तो ऐसे काम भैय्या ने किये कि याद कर ग्लानि भी होती है इतने बड़े नेता से हमने कैसे कैसे काम करवा लिये 2008 में हरिद्वार का कुम्भ था हम यहाँ से दिल्ली पहुंचे और सड़क मार्ग से हरिद्वार जाने की योजना थी किन्तु दिल्ली जा कर पता चला कि हरिद्वार शहर के 10 किलोमीटर बाहर बेरिकेटिंग कर वाहनों को रोक दिया जा रहा है अतः हरिद्वार जाने के लिए रेल से अच्छा कोई साधन नहीं है कुम्भ का सीजन सारी ट्रेनें फुल थीं फिर क्या था हर बार की तरह भैय्या को फोन किया गया भैय्या रायपुर में थे पहले तो थोड़ा नाराज हुए हलकी घुड़की पिलाई उनके शब्द यूं थे , ‘ बेवकूफी भरे काम करते हो बिना किसे पूर्व योजना के हवाई जहाज में बैठे और दिल्ली पहुँच गए ! चलो हम देखते है क्या हो सकता है ‘ और फोन रख दिया आधे घंटे के अंदर उनके दिल्ली वाले माकन से उनके स्टाफ दुर्गा प्रसाद का फोन आया राजीव जी रेल भवन के फलां फ्लोर में पद्मनाभन जी से मिलें हम वहां पहुंचे तो पद्मनाभन जी हमें रेलवे के किसे बहुत बड़े अधिकारी के कक्ष में ले गए और उनसे बताया कि ये राजीव चौबे जी हैं उन साहब ने कुर्सी से उठ कर बड़ी गर्मजोशी से मुझसे हाथ मिलाया और कहा अच्छा तो आप विद्या चरण शुक्ल जी भांजे हैं। मुझे एक बड़ा झटका लगा फिर भी मैंने खुद को सम्हाला और बिना हाँ ना कहे बस मुस्कुरा दिया हरिद्वार की ट्रेनों के नो रूम होने की वजह से वेटिंग टिकिट भी बंद कर दी गई थी , आनन फानन में लाइन खोल कर एसी टू की तीन वेटिंग टिकट निकली गई तीन वेटिंग टिकटों के लिये पूरे देश के लाइन खुली और बंद हुई फिर पी एन आर नंबर डी आर एम कोटे के लिए भेजा गया और हमें बताया गया की रात 11 बजे वाली गाड़ी में आपकी तीन सीट कन्फर्म हो जाएगी। ट्रैन की तीन टिकटों जैसे छोटे से काम के लिए विद्या भैय्या जैसे बड़े नेता का रेलवे के अधिकारी को फोन करने को मैं सहज रूप में स्वीकार नहीं कर पा रहा था लेकिन जब पूरी बात पता चली तो मैं सचमुच हतप्रभ हो गया हमारे रेल भवन से बहार आने के तत्काल बाद मुझे फिर दुर्गा प्रसाद का फोन आया और जो उसने बताया वो मेरे जीवन की सबसे अविस्मरणीय बात हो गई बकौल दुर्गा प्रसाद विद्या भैय्या ने ट्रेन की तीन टिकटों के लिए तत्कालीन रेल राज्य मंत्री मुनियप्पा जी को फोन किया जो उस वक्त सोनिया गाँधी के साथ कर्णाटक दौरे पर थे और भैय्या ने ही उनसे कहा कि हमारा भांजा राजीव चौबे दिल्ली में है और उसके हरिद्वार पहुंचने का इंतजाम करवाएं। ये बताता है कि छोटे से छोटे कार्यकर्ता के काम के लिए भैय्या बड़ी से बड़ी जगह सिफारिश करने से नहीं चूकते थे। 2002 से 2013 तक भैय्या के दुर्ग भिलाई प्रवास पर उनका अधिकम भोजन मेरे निवास पर हुआ भैय्या खाने के बहुत शौक़ीन थे और और बड़े इत्मीनान से भोजन करते थे ।
25 मई 2013 का दिन मेरे इस जीवन काल का सबसे बुरा दिन था रात आठ बजे एक मित्र का फोन आय और उसने बड़े सपाट लहजे में प्रश्न किया , क्या विद्या भैय्या भी घायल हुए हैं ? मेरे लिए बड़ा अप्रत्याशित प्रश्न था मैंने हड़बड़ा कर पुछा क्या हुआ उसके पास आधी अधूरी जानकारी थी उसने बताया कि बस्तर प्रवास पर गए कॉंग्रेस नेताओं पर नक्सली हमला हुआ है ज़ी 24 घंटे और अन्य कई चैनलों में समाचार चल रहा है। कुछ क्षणों के लिए तो मैं लगभग चेतना शून्य हो गया फिर तत्काल टी वी चलाया और ताबड़तोड़ फ़ोन घुमाना चालु किया मई जनता था दौलत रोहड़ा और रामावतार देवांगन जी भैय्या के साथ गए थे उनके अलावा भैय्या का ड्राइवर बाला भी था मैने तीनो नंबर लगाए तीनों पहुंच से बाहर थे भैय्या के मोबाईल पर भी कॉल किया वो भी पहुँच से बाहर था फिर तत्काल जगदलपुर में भैय्या के करीबी कार्यकर्त्ता अतिरिक्त शुक्ल को फोन किया अतिरिक्त ने मुझे बताया की कोंग्रेसी काफिले पर झीरम घाटी में जबरदस्त नक्सली हमला हुआ है जिसमे कई वरिष्ठ नेताओं के मारे जाने की खबर है और विद्या भैय्या बुरी तरह से जख्मी हैं उनको जगदलपुर लाया जा रहा है। उस बदहवासी में मैंने जा जाने कितने फोन लगा डाले बेमेतरा में सीमा द्विवेदी से चर्चा हुई तो उन्होंने बताया कि भैय्या को जगदलपुर लाया जा रहा है और संयोग से डॉ संदीप दवे इस वक्त जगदलपुर में हैं फिर मैंने तत्त्काल जगदलपुर में अपने बहुत ही करीबी पारिवारिक मित्र पुष्पराज श्रीवास्तव को फोन किया और उसे कहा चरण महारानी अस्पताल पहुंचे और भैय्या के वहां पहुँचने से पहले उनके ब्लड ग्रुप के खून की व्यवस्था कर के रखे हालाँकि पूरा शासन प्रशासन व्यस्था में जूता था फिर भी मुझे चैन नहीं था इसके बाद मैंने फिर सीमा द्विवेदी जी से बात की और बताय की मैं जगदलपुर रावना हो रहा हूँ और आनन् फानन में रात 8 :00 बजे के लगभग मैं घर से निकल गया घर में पत्नी भी चिंतित थी कई जगह से कोंग्रेसियों द्वारा चक्का जाम और हलकी फुलकी तोड़ फोड़ की ख़बरें आ रही थी कार में बैठे बैठे मैं लगातार फोन पर जगदलपुर के दोस्तों से संपर्क में था हमारे गुंडरदेही पार करते करते पुष्पराज का फोन आ गया कि भैय्या महारानी अस्पताल पहुँच गए हैं और अर्ध चेतन अवस्था में हैं बात भी कर रहे हैं डॉ संदीप दवे उन्हें लेकर ऑपरेशन थियेटर जा चुके हैं। घंटे भर बाद मैंने डॉ संदीप दावे को कॉल लगाया औइर संयोग से उन्होंने उठा लिया मेरे पूछने पर उन्होंने बताया की भैय्या की हालत चिंताजनक किन्तु खतरे से बाहर हैं। कुछ ही देर में हम गुरुर पहुँच गए तो वहां देखा कॉन्ग्रेस कार्यकताओं ने सड़क जाम कर राखी थी और वे भारी आक्रोश में थे किसी भी गाडी को बढ़ने नहीं दे रहे थे संयोग से मुझे गुरुर के वरिष्ठ नेता और मेरे मित्र गुलाब खत्री दिख गए जो कि विद्या भैय्या के भी काफी करीबी थे मैंने जब गुलाब खत्री को बताया कि मैं भैय्या के पास जगदलपुर जा रहा हूँ तो उन्होंने मेरी गाडी के लिए रास्ता बनवाया और हम आगे बढे इस हमारे चारामा पर करते जगदलपुर से फ़ोन आया की भैय्या का प्राथमिक उपचार के बाद उनको हेलीकाप्टर से रायपुर ले गए हैं अतः आप वापस लौट जाएँ। हमने फिर रायपुर का रुख किया और रायपुर के साथियों से संपर्क करने लगे तो पता लगा कि एयर एम्बुलेंस आ गई है और भैय्या को मेदांता अस्पताल गुड़गांव ले जा रहे हैं हमारे रायपुर पहुँचने से पहले एयर एम्बुलेंस दिल्ली रवाना हो चुकी थी। 26 मई की सुबह उन्हें एयर एम्बुलेंस से दिल्ली शिफ्ट किया गया और 26 मई को ही शाम की फ्लाइट से मैं दिल्ली रवाना हुआ मेरे निकलने से पहले भैय्या के सहायक छबि का फोन आया कि एयर पोर्ट जाने से पहले राधेश्याम भवन से भैय्या का कुछ सामान लेते हुए जाना है। मुझे जीवन भर याद रहेगा भैय्या का मोबाईल फोन और उनकी रुद्राक्ष की माला मुझे सौंपी गई थी उनतक पंहुचने के लिये जब मैं मेदांता हॉस्पिटल पहुंचा तो वहां सिर्फ भैय्या के परिवार के सदस्य ही थे बाकि सभी कार्यकर्ताओं को दिल्ली आने से मना कर दिया गया था भैय्या की पुत्रियों और नाती नातिनों का किसी से संपर्क नहीं रहा उनकी बड़ी पुत्री प्रतिभा दीदी कुछ करीबी कार्यकर्ताओं को पहचानती थी इनके अलावा भैया के भांजे नागपुर से संजय मिश्रा , भैय्या के दामाद डॉ अनिल वर्मा और भैय्या के सबसे चहेते बलदेव सिंह भाटिया के अलावा बेमेतरा से सीमा द्विवेदी और रायगढ़ से भैय्या के करीबी कार्यकर्त्ता यतीश गांधी भी मौजूद थे। मैं चार दिनों तक गुडगाँव में रहा भैय्या मेदांता हॉस्पिटल के पांचवे फ्लोर स्थित आई सी यू में थे और उनके परिजनों के लिए शायद ग्यारहवीं मंजिल में अपार्टमेंट था मैं सुबह से शाम वहीं रहता था। पूरे चार दिन इस आस में निकल गए कि शायद आइ सी यू के खिड़की से भैय्या को देखने का अवसर मिल जाय लेकिन मेदांता अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था इतनी चाक चौबंद थी कि आई सी यू तो दूर सारी मशक्कत के बाद भी मैं उस फ्लोर तक न पहुँच सका और शायद पांचवे दिन भैय्या की हालत में उल्लेखनीय सुधार की खबर लिए बड़ी उम्मीदों के साथ मैं वापस लौट आया पर भैय्या लौट कर न आए 11 जून 2013 को छत्तीसगढ़ की राजनीती का सुनहरा अध्याय समाम्प्त हो गया । भैय्या के बारे में मैंने हमेशा ही लिखा है कि नेताओं के लिए समर्पित लाखों कार्यकर्ता देखे लेकिन कार्यकर्ताओं के लिए समर्पित एक ही नेता देखा वो विद्या भैय्या थे ।

