ये है कश्मीरियों का असली सच !नहीं बदल सकती जेहादी मानसिकता !

पहलगाम में आतंकी हमले के दो दिन की अंदर ही भारत की सेक्युलर फ़ोर्स नरेटिव गढ़ने के अपने पुराने घंधे में लग गई है अब देखिये कल तक जो कहते थे कि  आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता उन्होंने आतंकवाद के धर्म का खुला खेल देख लिया  पहले दिन तो वे सब मौन रहे उसके बाद पूरे देश में इनका सुनियोजित ड्रामा चालू हो गया सबसे पहले तो इन्होने पहलगाम की घटना में मरने वाले एकमात्र मुस्लिम व्यक्ति का उदहारण देते हुए फिर से ये साबित करने का प्रयास किया जा रहा है कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता और आतंकियों के टारगेट में सिर्फ हिन्दू ही नहीं थे ऐसी स्थिति मैं इन सेक्युलर बुद्धिजीवियों  को बताना चाहूंगा कि पहलगाम में जेहादियों ने जिस मुस्लिम युवक सैय्यद आदिल हुसैन की जान ली वो इसलिए नहीं ली कि वो मुस्लिम था  बल्कि वो इस लिए मारा गया क्यों कि वो उन जेहादियों से बन्दूक छीनने की कोशिश कर रहा था ये सच है की ऐसी स्थिति में जहाँ उसकी जान को कोई खतरा नहीं था उस युवक ने दूसरों के लिए अपनी जान गँवा दी उसका बलिदान नमस्य है !किन्तु ये भी अकाट्य सत्य है कि अगर उसने बन्दूक छीनने की कोशिश न की होती तो वो सिर्फ मुस्लिम होने के कारण मरने से बच जाता।
 अब बात करते हैं उस जेहादी उत्पात के बाद कश्मीरियों के रवैय्ये की , कश्मीर घाटी में किसी जेहादी घटना के विरोध में पहली बार बंद का एलान हुआ बंद का आह्वान मेहबूबा मुफ़्ती की पार्टी पी डी पी और ने किया और ऐसा बताया जा रहा है कि इस बंद को आम कश्मीरियों का खुला समर्थन मिला इस घटना को भी सेक्युलर , लिबरल इंटेलेक्टुअल्स , इंसानियत और कश्मीरियत के गुणगान में लगे हैं इसी सिलसिले  मैं आपको एक वीडियो दिखाना चाहूंगा।  देखिये ये वीडियो।

 इस वीडियो को देखने बाद एक नये शब्द  की जानकारी मिली ‘ अल तक़ैय्या  ‘ इसका मतलब ये होता है कि मुसलमान जब संख्या में कम हो गैर इस्लामिक लोगों से घिरा हो या फिर जब परिस्थितियां विपरीत हो तो उसे अपने माल-ओ -असबाब को बचाने के लिए वातावरण के अनुसार ढल कर झूठ बोल कर अपना मतलब निकल लेना चाहिए।
अब इस वीडियो के बाद अब को ये समझने में सहूलियत होगी कि कश्मीरियों ने इस घटना का विरोध क्यों किया तो ये बड़ी स्पष्ट सी बात है की कश्मीरियों के विरोध के पीछे इंसानियत , कश्मीरियत जैसा कुछ भी नहीं है आज से दो साल पहले सेना पर पत्थर मारने वालों , जेहादियों को समर्थन और प्रश्रय देने वालों  , इंडियंस गो बैक के
नारे लगाने वालों  , तिरंगा झंडा जलाने वालों ,पाकिस्तानी झंडा फहराने वालों  का अचानक ह्रदय परिवर्तन कैसे हो गया ? ज्यादा साल नहीं बीते हैं जब हमने हाथ में बन्दूक रखे और अपने हाथों को बांध कर इन्ही कश्मीरियों से पत्थर खाते भारतीय सेना के जवानों को टी वी पर लाइव देखा है। आज अपनी रोजी रोटी पर खतरा देख पकिस्तान को कोसने का नाटक करने वाले कश्मीरी पहले तो ये बताएं की बिना लोकल सपोर्ट के कोई पाकिस्तानी सही समय , सही जगह पर सही शिकार को कैसे पकड़ सकता है खबर तो ये भी है कि उस घटना के तुरंत बाद से उस क्षेत्र के बहुत से रेडी वाले ठेले वाले और अन्य फुटकर व्यापारी लापता हैं जिनपर स्लीपर सेल होने की आशंका जाहिर की जा रही।  बाढ़ और भूकंप में इन कश्मीरियों की जान बचाने के लिये अपनी जान पर खेलने वाली भारतीय सेना से इनका दुर्व्यवहार हम सबने अपनी आँखों से देखा है।  दरअसल यही अल तक़ैय्या है  केंद्र सरकार की सख्ती और 370 हटने के बाद इन कश्मीरियों पत्थरबाजी के लिए को मिलने वाले पैसे बंद हो गए लेकिन जेहादी घटनाओं में अंकुश लगने की वजह से कश्मीर में पर्यटन बढ़ा और पिछले वित्तीय वर्ष में कश्मीर में पर्यटकों की संख्या के आज तक के सारे रिकॉर्ड टूट गए तब कश्मीरी  ये समझ पाए कि पत्थरबाजी के पैसों से पर्यटकों से होने वाली कमाई ज्यादा बेहतर है क्यों की इसमें वे कानून के गुनहगार भी नहीं बनते।  इस तरह पर्यटन से इनका भारी मुनाफा अपने शबाब पर पहुंचा ही था कि पहलगाम में जेहादियों ने पर्यटकों का धर्म पूछ कर उनकी हत्या कर दी एक ही झटके में पूरी कश्मीर घाटी पर्यटक विहीन हो गई अब समस्या कश्मीरियों की रोजी रोटी की है इसलिए ये बंद ,  ये कैंडल मार्च , ये बताने के लिए है कि हम इस जेहाद का समर्थन नहीं कर रहे हैं लेकिन इस कश्मीर बंद और जिहाद के विरोध में कैंडल मार्च पर प्रश्न फिर अल तक़ैय्या का आता है वो इसलिए की अब निकलने वाले मोर्चे दिल के नहीं दिमाग की उपज हैं जो पेट की जरूरत से भी उपजे हैं  अगर ऐसा नहीं है तो पहलगाम की जेहादी घटना के विरोध में निकले कैंडल मार्च में कश्मीरियों की संख्या की तुलना कश्मीर के छोटे से गॉंव त्राल में बुरहान बानी के जनाजे में उमड़े लाखों कश्मीरियों की संख्या से कर के देखिये अंतर आपको साफ़ दिखेगा। आज उनकी एकमात्र चाह यही है कि  पर्यटक यहाँ फिर से आएं और इसके लिए वे विक्टिम कार्ड खेल रहे हैं पर्यटकों  को अपने घर के चूल्हे का भी वास्ता दे रहे हैं और देश के सारे सेक्युलर , लिबरल इंटेलेक्टुअल्स  इनकी इंसानियत और कश्मीरियत के नाम पर और इनका रोजगार छीने जाने के नाम पर छाती पीट रहे हैं । अब देश भर के आम हिन्दू पर्यटक उनके  चूल्हे में खुद को जलाने जायेंगे या नहीं ये तो समय ही बताएगा लेकिन फिलहाल के लिये देश के सारे सेक्युलर , लिबरल इंटेलेक्टुअल्स , को तो तत्काल कश्मीर की और कूच  कर देना चाहिए भ्रमण भी होगा मौसम का आनंद भी होगा और निरीह कश्मीरियों का चूल्हा भी जलेगा।  

By editor