छत्तीसगढ़ के सियासी गलियारों से इस वक्त एक बड़ा बयान सामने आया है।
राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस बाबा ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मुगलों को लेकर दिए गए बयान का खुलकर समर्थन किया है।
दरअसल, टीएस बाबा आज भिलाई नगर के विधायक देवेंद्र यादव से मुलाकात करने उनके सेक्टर-5 स्थित निवास पहुंचे थे। इसी दौरान मीडिया से चर्चा में उन्होंने इतिहास, धर्म और वर्तमान राजनीति को लेकर खुलकर अपनी बात रखी।
मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए टीएस बाबा ने कहा कि मुगल शासक संख्या में बहुत कम थे और वे अपने धर्म का विस्तार जबरन नहीं कर सकते थे। उन्होंने कहा कि भारतीय इतिहास में यह साफ तौर पर देखा जा सकता है कि जो भी राज कर रहे थे, वे संख्या में सीमित रहते थे और अपने संबंध आपस में ही बनाते थे। धर्म के नाम पर किसी बड़े पैमाने पर ज़बरदस्ती का कोई उल्लेख इतिहास में नहीं मिलता।
टीएस बाबा ने कहा कि हिंदू सभ्यता में सदियों से यह परंपरा रही है कि धर्म को व्यक्तिगत आस्था का विषय माना गया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सम्राट अशोक हिंदू थे, गौतम बुद्ध का जन्म भी एक हिंदू परिवार में हुआ, लेकिन उन्होंने बौद्ध धर्म को नई दिशा दी। कहीं भी ऐसा उल्लेख नहीं मिलता कि लोगों को ज़बरदस्ती बौद्ध बनाया गया हो।
पूर्व डिप्टी सीएम ने आगे कहा कि इसी तरह इस्लाम धर्म और मुगल शासकों के संदर्भ में भी इतिहास में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिलता कि उन्होंने हिंदुओं पर संगठित तरीके से धार्मिक अत्याचार किए हों। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे स्वयं इतिहास पढ़ते हैं, लेकिन उन्हें कहीं भी इस तरह का कोई प्रमाण नहीं मिला।
टीएस बाबा ने अपने निजी अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि वे सरगुजा रियासत से आते हैं, जो एक राज परिवार रहा है। मुस्लिम शासकों के दौर में भी वहां हिंदू सुरक्षित थे और कभी भी धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं हुआ।
इतना ही नहीं, टीएस बाबा ने तीखे शब्दों में कथित धर्मगुरुओं पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि कुछ धर्मगुरु लोगों को भावनात्मक रूप से उकसाकर बेवकूफ बना रहे हैं। उनका मकसद सिर्फ और सिर्फ भारतीय जनता पार्टी को वोट दिलाना है।
टीएस बाबा ने कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि जो भी धर्म के नाम पर नफरत फैला रहा है, वह जनता को गुमराह कर रहा है और समाज को बांटने का काम कर रहा है।
अब टीएस बाबा के इस बयान के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर इतिहास, धर्म और सियासत को लेकर बहस तेज हो गई है।

