भिलाई चरोदा से कुम्हारी तक… डिवाइडर के ऊपर बनाए गए पैदल पार पथ यानी “फुट कट” को बंद करने के जिला प्रशासन के निर्णय ने आमजन को सड़क पर ला खड़ा किया है।
PWD विभाग के एकतरफा फैसले के खिलाफ अब जनता खुलकर विरोध में उतर आई है।
न कोई सर्वे, न कोई विकल्प… और सीधा जनता पर फैसला थोप दिया गया!
बिना स्थल निरीक्षण के पास किए गए प्रस्ताव ने, शहरवासियों को दो हिस्सों में बाँट दिया है।
एक ओर अस्पताल… दूसरी ओर थाना।
एक तरफ रेलवे स्टेशन… तो दूसरी तरफ सब्जी मंडी और पेट्रोल पंप।
अब सवाल उठता है – आखिर आमजन जाए तो जाए कहां?
विरोध कर रही जनता का साफ कहना है –
“जनप्रतिनिधि जनता की नहीं, विभागीय फाइलों की भाषा बोल रहे हैं।”
वहीं दूसरी तरफ, क्षेत्रीय विधायक का तर्क है कि दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए ये कट बंद करना ज़रूरी है।
लेकिन सवाल ये है कि क्या जनता की सुविधा से ज्यादा ज़रूरी है डिपार्टमेंट की सुविधा?
क्या सड़क सुरक्षा का मतलब आमजन की मुश्किलें बढ़ाना है?
कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के दखल और घंटों की बातचीत के बाद आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा… और दो स्थानों पर कट को खोला गया।
लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह समाधान नहीं, समझौता है।
अगर जनभावनाओं को नजरअंदाज़ किया गया, तो ये मामला निकाय और विधानसभा चुनाव में भारी पड़ सकता है।
नाराज जनता का कहना है — अब नहीं झुकेंगे, हक़ लेकर रहेंगे।

