प्रियंका गांधी बाइबल के साथ गीता और रामायण भी पढ़ें !प्रधानमंत्री को कायर कहने वाले पहले अपने गिरेबान में झाँके !

आज के विश्लेषण के विषय में जाने से पहले आइये आप को दो छोटी छोटी कहानियां सुनाता हूँ। पहली कहानी –  किसी समय किसी गाँव में एक अधेड़ आदमी अपने 11 – 12 साल के बेटे और एक गधे को लेकर पड़ोस के गाँव जा रहा था बाप बेटे दोनों पैदल च रहे थे साथ में गधा भी चल रहा था उन्हें जाता देख राह चलते व्यक्ति ने टिपण्णी की देखो कैसा कैसे मूर्ख लोग हैं  गधे पे न बैठा कर पैदल चल रहे  हैं  , बाप को लगा कि बात तो ठीक है जब गधा साथ है तो बेटे को उस पर बैठना ठीक रहेगा और उसने अपने बेटे को गधे पर बैठा दिया। वे कुछ ही दूर चले थे एक और आदमी पास से गुजरा वो कहने लगा इंसानियत मर गई है बुर्जुर्ग आदमी पैदल चल रहा है और हृष्ट पुष्ट बालक आराम से गधे पर बैठा है।  बच्चे को शर्मिंदगी महसूस हुई तुरंत नीचे उतर गया और बोला  पिता जी आप थक गए हैं आप गधे पर बैठ जाएँ। बाप गधे पर बैठा ही था की फिर एक आदमी गुज़रा उसने कहा की कैसा अत्याचारी बाप है खुद गधे पर बैठा है और बच्चे को पैदल चलवा रहा है बाप को फिर लगा की कुछ तो गलत है उसने अपने साथ बेटे को भी गधे पे बैठा लिया , फिर एक आदमी बगल से गुजरा उसने कहा  बेज़ुबान पर कैसाअत्याचार हो रहा है एक बेचारे जानवर पर दो दो आदमी सवार हैं।  बाप बेटे दोनों इतने शर्मसार हुए की नीचे उतरे और दोनों ने मिलकर गधे को अपने सर पर बैठा लिया और चलने लगे फिर एक रहगुज़र मिला और जोर जोर से हंसने लगा कैसे मूर्ख लोग हैं जो गधे को अपने सर पर ढोए हुए हैं।  
दूसरी कहानी एक हिंदी फिल्म का हिस्सा है मशहूर चरित्र अभिनेता कादर खान है चौरंगी लाल दोमुखिया वे विपक्ष के नेता हैं एक दिन शहर से बहार जाते हुए अपने सचिव से कहते हैं कल मंत्री जी हेलीकाप्टर से बाढ़ग्रस्त क्षेत्र के दौरे पे जायेंगे तुम मेरी तरफ से प्रेस रिलीज़ जारी कर देना कि जनता बाढ़ के पानी में डूबी हुई है उनको खाने के लिए दाना नसीब नहीं हो रहा है और मंत्री जी जनता के गाढ़ी मेहनत के पैसों से ऐश कर रहे हैं , हवाई यात्रा कर पिकनिक मन रहे हैं।  इस पर उनका सचिव पूछता है कि यदि मंत्री जी सड़क मार्ग से चले गए तो ? इसपर नेता जी कहते हैं तो लिख देना कि बाढ़ जैसी गंभीर समस्या को मंत्री जी कितने हल्के में ले रहे हैं जहाँ सैकड़ों लोग पानी में फंसे हुए हैं दाने दाने को मोहताज़ हैं उन्हें तत्काल रहत की आवश्यकता है ऐसे में मंत्री जी हेलीकाप्टर जैसी शासन की सुविधाओं का प्रयोग न कर , कार से पिकनिक मानाने जा रहे हैं।  
       इन दोनों कहानियों का सार ये है कि आप जो भी काम करें जैसा भी करें जिसे आलोचना करना है वो आलोचना ही करेंगे।  निश्चित रूप से ये मैंने दोनों कहानियां भारत सरकार , प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विपक्षी पार्टियों के सन्दर्भ में ही सुनाई है।  
22 अप्रेल 2025 को पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकवादियों ने 27 हिन्दू पर्यटकों की हत्या की , केंद्र सरकार ने इसपर कड़ा रुख अख्तियार किया और सारी परिस्थितियों का आंकलन करने के बाद प्रधानमन्त्री ने अग्र कारवाई सेना को खुली छूट दे दी।  07 मई से दस मई तक को भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान के मुज़फ़्फ़राबाद , कोटली , बरनाला , मुरीदके ,महमूना जोया , सरजाल और बहावलपुर में कुल 9 आतंकी ट्रैनिंग कैम्प्स तबाह कर दिए , इसके बाद पाकिस्तान में खलबली मची और पकिस्तान ने भारत पर हवाई , मिसाइल और ड्रोन से हमले किये जिसे भारतीय एयर डिफेन्स सिस्टम ने ना सिर्फ विफल किया बल्कि उनके 3 लड़ाकू विमान और कई ड्रोन्स मार गिराए , इसके साथ ही भारत ने पाकिस्तानी एयर डिफेन्स सिस्टम को पूरी तरह से तबाह कर दिया।
इसके बाद भारत ने पाकिस्तान के सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण कुछ एयर बेस को अपना निशाना बनाया और सरगोधा, नूर खान, भोलारी और सुक्कुर के एयरबेस को भारी नुक्सान पंहुचाया ।  इन एयर बेस को भारतीय सेना ने पिन पॉइंट पर भेदा।  उरी के बाद की सर्जिकल स्ट्राइक पर सबूत मांगने वाला विपक्ष मौन हो गया  क्यों की  सैटेलाइट फोटोज  विडिओस के बाद  लिए कुछ बचा नहीं था।  पाकिस्तान की सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार कबूल किया है कि भारत के साथ संघर्ष में उसके अभी तक 11 सैन्य अधिकारी मारे गये हैं और 78 से ज्यादा घायल हो गये हैं। इसके अलावा, भारतीय आक्रमण में 40 आतंकी मारे गए और 121 घायल हुए ।
तीन दिनों भारत के घातक आक्रमण और अभेद्य सुरक्षा तंत्र ने पाकिस्तानी रक्षा तंत्र को झकझोर डाला था पकिस्तान के भारत पर किये गए सारे हमले निष्फल हुए और भारत के किसी हमले को पकिस्तान रोक नहीं सका 10 मई को पकिस्तान के डी जी एम ओ ने भारत के डी जी एम ओ से फोन पर लगभग समर्पण भाव से सीज़ फायर के लिए निवेदन किया इसके बाद दोनों देशों की तरफ से सीज़फायर की घोषणा हुई।

ऑपरेशन सिन्दूर के वक्त देश का पूरा का पूरा विपक्ष संकट की घड़ी में देश के साथ होने का दावा कर रहा था , सीज़फायर के तुरंत बाद फिर से उनका विधवा विलाप शुरू हो गया और वो सीज़फायर के विरोध में प्रधान मंत्री को कोसने लगे हैं लेकिन सीज़फायर का विरोध करने वाला विपक्ष ये बताने में असमर्थ है कि वे प्रधान मंत्रीऔर सेना से चाहता क्या है ? ये तय बात है कि यदि भारत पाक में आधिकारिक युद्ध प्रारम्भ हो जाता तो कुछ दिनों बाद आज सीज़फायर पर प्रधान मंत्री को कोसने वाले यही विपक्ष युद्ध की विभीषिकाओं के लिए प्रधान मंत्री को कोसता नज़र आता कुल मिला कर गधे और चौरंगीलाल दोमुखिया की कहानी है प्रधान मंत्री जो करें वो गलत है।  

आज प्रियंका गाँधी चीख चीख कर कॉंग्रेस और आयरन लेडी इंदिरा गाँधी के पराक्रम के किस्से सुना रही है तो उनको पहले अपनी गलतियों को भी याद करना चाहीये।  
पहली गलती – 1948  में राजा हरी सिंह के भारत में शामिल होने के तत्काल बाद कश्मीर पहुंची भारतीय सेना ने जब कबाईलीयों के भेस में पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ना शुरू किया तो वे पाक सेना को इस्लामाबाद तक खदेड़ने की क्षमता रखते थे लेकिन उन्हें पूरे कश्मीर से बहार भी नहीं करने दिया और एक तिहाई कश्मीर को पाक को सौंप कर अंतर्राष्ट्रीय न्यायलय में औचित्यहीन वाद प्रस्तुत करना ।
दूसरी गलती – 1965 के युद्ध के दौरान पी ओ के हथियाने का अवसर खोना और अन्तराष्ट्रीय दबाव में आकर संघर्ष विराम की सहमति देना तथा ताशकंद समझते पर हस्ताक्षर करना।
तीसरी गलती 1971 में बांलादेश में पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण के बाद तिरानबे  हजार पाकिस्तानी सैनिकों की निशर्त रिहाई उस समय हारे पिटे पकिस्तान से तिरानबे हजार सैनिकों के बदले पी ओ के वापसी की मांग न करना।
अब ऑप्रेशन सिन्दूर की बात करें तो 22 अप्रेल को पहलगाम के नरसंहार का पूरा पूरा बदला भारत ने ले लिया पकिस्तान में चल रहे कई आतंकी कैंप नष्ट कर दिए , पाकिस्तानी एयर डिफेन्स सिस्टम को पूरी तरह से तबाह कर दिया , उनके 3 लड़ाकू विमान और कई ड्रोन्स मार गिराए ,  11 सैन्य अधिकारी मारे गए और 78 से ज्यादा घायल हो गये हैं। इसके अलावा 40 आतंकी मारे गए ,121 घायल हुए और कई एयर बेस को भारी नुक्सान पंहुचाया।
ये तय बात है कि 1947 से आज तक भारत की पाकिस्तान के बीच जितने  भी संघर्ष हुए उनमे सबसे ज्यादा सफल ऑपरेशन सिंदूर रहा  क्योंकि इस ऑपरेशन में भारत की न्यूनतम क्षति हुई और भारत ने पकिस्तान को अधिकतम क्षति पंहुचाई और  बावजूद इसके विपक्ष कहता है , ” ये दिल मांगे मोर ” तो फिर वो ये भी बताए की कितना मोर ? कल तो प्रियंका गाँधी ने प्रधान मंत्री को कायर कह डाला और प्रधान मंत्री की तुलना में अपने भाई की बहादुरि का बखान करते हुए बताया की किस तरह उनका बहादुर भाई अपने पिता के जनाजे में माँ के मन करने के बाद भी कार से निकल कर सेना की ट्रक में अपने पिता के शव के पास जा कर खड़ा हो गया ! प्रियंका गाँधी ने बताया कि तिरंगे झंडे में उनके पिता का खून लगा है , उनकी दादी का खून लगा है।
 प्रियंका गाँधी ये नहीं बता पाई कि वे प्रधान मंत्री से चाहती क्या हैं ?
क्या प्रियंका गाँधी चाहती हैं  कि देश को युद्ध की आग में झोक दिया जाना चाहिए ? क्या प्रियंका गाँधी चाहती हैं  कि भारत का आर्थिक विकास थम जाए ?
 क्या प्रियंका गाँधी चाहती हैं कि हज़ारों सैनिकों के प्राणों की आहुति दे दी जाए ?
 क्या प्रियंका गाँधी चाहती हैं कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले भारतीय किसान , मजदूर , व्यापारियों के घर बर्बाद हो जाएँ ?
क्या प्रियंका गाँधी चाहती हैं कि देश के उद्योग धंधे बंद हो जाएँ ?
क्या प्रियंका गाँधी चाहती हैं कि भारत का शेयर बाजार औंधे मुंह गिरे और करोड़ों देशवासी बर्बाद हो जाएँ ?

महाभारत युद्ध से पहले  कौरवों के पास संधि प्रस्ताव ले जाने से पूर्व जब भगवन कृष्ण ने पांडवों को बताया कि शांति के लिए अंतिम प्रस्ताव के रूप में वे कौरवों से मात्र 5 गाँव मांगेंगे तो इसमें भीम और अर्जुन ने असहमति जताई तब भगवन ने कहा था कि शान्ति जिस मोल मिल जाये सस्ती है ! प्रियंका जी को चाहिए कि यदि उनका धर्म अनुमति दे तो वे बाइबल के साथ रामायण और गीता भी पढ़ें तो युद्ध और शांति के विषय में उनके विचार भी व्यावहारिक और प्रासंगिक हो जायेंगे।
और पूरे विपक्ष के लिए भी अब समय आ गया है कि सत्ता के हर निर्णय के विरोध की परिपाटी को बदले और कम से कम देश और जनता के हित में लिए गए निर्णय का विरोध कर देश और जनता के गुनहगार बनने से बचे।  

By editor