अप्रैल 2025 में चैत्री नवरात्री के अवसर पर झारखण्ड में हज़ारीबाग के सांसद द्वारा तलवारें बांटे जाने के बाद देश की सेक्युलर फोर्स ने जबरदस्त प्रतिक्रिया देते हुए घटना का विरोध किया था ।अद्भुत संयोग है कि जिस दिन हज़ारीबाग में तलवार बांटी गई उसी दिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रम सम्वत 2082 को इस चैनल पर मैंने शक्ति की उपासना के साथ नववर्ष के प्रारम्भ की बात कही थी और उस वीडियो में शक्ति की साधना के उद्देश्य और महत्त्व पर भी प्रकाश डाला था। डिस्क्रिप्शन बॉक्स में आपको उस विडिओ का लिंक भी मिलेगा उसे एक बार फिर देखिएगा। बहरहाल देश भर के सेक्युलर नेता और कथित बुद्धिजीवी , सांसद पर सौहाद्र और शांति भांग के प्रयास के आरोप लगा रहे हैं। ऐसी स्थिति एक बार फिर बहुतेरे प्रश्न इन सेक्युलर फोर्सेस के लिए भी उभर कर आते हैं।
सर्वप्रथम तो ये कि धर्म के रक्षण के लिए शस्त्र संचालन की व्यवस्था सिर्फ सनातन में नहीं है कैथलिक ईसाइयों की वेटिकन सिटी में धर्म रक्षक सेना के रूप में स्विस गॉर्डस हैं इस्लाम के प्रसार के लिए खलीफा की सेना हुआ करती थी जो जेहाद के नाम पर शस्त्र धारण करते थे और आज भी कर रहे हैं , कुंगफू जैसे प्राणघातक मार्शल आर्ट का जन्म चीन के बौद्ध मठों में हुआ जिसमे समुराई और नान चाकू जैस शत्रों का प्रयोग होता है , खालसा पंथ में प्रत्येक सिख के लिए कृपाण अनिवार्य है ।
ऐसे में सांसद के तलवार बांटने का विरोध करने वाले सेक्युलर नेता और बुद्धिजीवीयों से RCN का एक ही प्रश्न है वे बस इतना बता दें कि इस देश में ईद मिलादुन्नबी का या फिर मुहर्रम पर निकलने वाले जुलूस में चमचमाती तलवारें लिए नाचते उन्मादी जेहादियों पर आज तक कभी किसी सेक्युलर नेता की कोई टिप्पणी आई है ? गुरुओं के प्रकाश पर्व पर सिख समाज के जुलूस में तलवार भाले लिए सिंहों और शस्त्र कौशल का प्रदर्शन करने वाले निहंगों पर भी कभी कोई टिपण्णी आई है ?
आखिर क्या है ये सेक्युलर मानसिकता जो सिर्फ सनातनियों को शक्तिहीन , हतबल , विवश और लाचार देखना चाहती है ? दरअसल ये यूरोप और हमारे पडोसी देश चीन से आयातित वामपंथी विचारधारा का दीर्घकालिक कार्यक्रम है , जिसके तहत भारत की युवा पीढ़ी को निस्तेज और निर्बल करने के एक सुनियोजित अजेंडे के तहत ये वामपंथी शक्तियां , विदेशी फंडिग पर काम करने वाले NGO’S की सहायता से हमारे देश की युवा पीढ़ी को खोखला करने में सक्रीय है । ये हमारा दुर्भाग्य है कि राजा नहुष , सहस्त्रबाहु , बाली ,प्रभु श्री राम , राजा भारत , गंगा पुत्र भीष्म , अंगराज कर्ण , कुंती पुत्र अर्जुन , अभिमंन्यु ,चंद्र गुप्त मौर्य , विक्रमादित्य , ललितादित्य , हर्षवर्धन, पृथ्वी राज चौहान , हमीर , बाप्पा रावल , राणा कुम्भा , राणा सांगा , राणा प्रताप , दशमेश गुरु गोविन्द सिंह जी , बाँदा सिंह बहादुर और छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे प्रतापी योद्धाओं की संतानों को पिछले 70 सालों में क्षमा , दया ,प्रेम सौहाद्र , शांति के नाम पर श्वेत कपोत उड़ाना सिखाया गया और पूरी की पूरी नस्ल को नपुंसक करने की साज़िश को अमली जामा पहनाने का प्रयास किया गया। इन्ही षड्यंत्रों को काफी करीब से देखकर मैंने कुछ पंक्तियाँ लिखी थी ……
बिता दी कई सदियां तूने श्वेत कपोत उड़ाने में ,
बिच्छू को सहलाने में नागों को दूध पिलाने में,
किन्तु भेड़ियों को शान्ति घोष कब समझ आता है ?
वन में तो विनम्रता को दुर्बलता ही समझ जाता है,
तेरे अंदर चक्रधर जागे , सोने दे बंशीधर गोपाल को ,
सौ की हुई गिनती पूरी बता दे अब शिशुपाल को ,
कौन है तू क्या है तेरी पहचान , बतलाने आया हूँ ,
भारत का हर हिन्दू जागे , मैं तुझे जगाने आया हूँ !
हमारी संस्कृति में शक्ति के संचय का उद्देश्य मात्र धर्म रक्षण ही होता है किन्तु आश्चर्य तब होता है जब , ” Power grows from the barrel of gun ” के सिद्धांतों में विश्वास रखने वाली विचारधारा के लोग ऐसे लोग जिनकी विचारधारा वर्ग संघर्ष और अहिंसा से ही उपजी है जिनका लोक तंत्र में विश्वास नहीं है जिनका अभिव्यक्ति की आज़ादी में विश्वास नहीं है जो आज भी अपने अपने हाथों लाल झंडे लिए भारत के सुदूर वनांचलों में प्रतिवर्ष हज़ारों बेगुनाह मासूमों की निर्मम हत्या कर रहे हैं उन्हें नवरात्री में किसी सनातनी के हाथ में तलवार से आपत्ति है।
इस देश के सारे सेक्युलर , लिबरल , समाजवादी , मार्क्स वादी , माओवादी गाँठ बाँध कर रख लें कि धर्म रक्षण के लिए शस्त्र धारण करना हमारी संस्कृति है और गीता में भगवान् का सन्देश भी यही है। धर्म रक्षण के लिए शस्त्र उठाने हेतु अर्जुन को प्रेरित करने के लिए भगवान् ने पूरी गीता पढ़ी थी लेकिन यदि कोई पूछे कि एक श्लोक में पूरी गीता का सार बता दो तो मैं कहूंगा।
हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्।
तस्मादुत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चयः !
अर्थात – युद्ध में अगर वीरगत हुआ तो तू स्वर्गको प्राप्त करेगा और अगर विजयी हुआ तो पृथिवी का राज्य भोगेगा।
इसलिये हे कौन्तेय युद्धके लिये निश्चय करके खड़ा हो जा।
धर्म युद्ध पाप नहीं है इसके समर्थन में गीता में भगवान ने ये भी कहा है।
सुख दुःखे समे कृत्वा लाभा लाभौ जया जयौ!
ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापम वाप्स्यसि !
अर्थात , ‘सुख-दुख को समान समझकर उनमे राग-द्वेष न करके तथा लाभ-हानि को और जय-पराजय को समान समझकर उसके बाद तू युद्ध के लिए चेष्टा कर इस तरह युद्ध करता हुआ तू पाप को प्राप्त नहीं होगा
तो अब समय आ गया है कि इस देश की तरुणाई को निर्बल करने का षड्यंत्र करने वाली सारी वाम पंथी और सेक्युलर ताकतें जान लें कि अब समय बदल गया है भारत की तरुणाई जाग गई है और अब धर्म रक्षण हेतु शस्त्र धारण शस्त्र धारण करने से उनको रोकना किसी के वश में नहीं है।

