उत्तिष्ठ भारतः मैं राजीव चौबे और आप देख रहे हैं राष्ट्रीय चेतना न्यूज़ आर सी एन में आपका स्वागत है।आज आर सी एन के दर्शकों से मेरा एक प्रश्न है क्या आपने कभी किसी भी तरह का जादू का खेल देखा है ? सड़क के किनारे मजमा लगाने वालों का , मेलों में खेल दिखने वालों का या फिर बड़े बड़े ऑडिटोरियमस में शो दिखने वालों का , ये सभी लगभग एक से खेल दिखाते हैं जिनमें टोपी के अंदर से कबूतर या खरगोश निकालना , खाली गिलास से दूध निकलना हवा में हाथ लहरा कर अंगूठी या तावीज निकाल देना अंत में सभी बताते हैं कि ये कोई चमत्कार नहीं बल्कि हाथ की सफाई और नजरों का धोखा या फिर दृष्टि भ्रम है। दरअसल ये दृष्टिभ्रम है , दृष्टिभ्रम वो तकनीक है जिसके सहारे जादूगर आपकी दृष्टि को दूसरी और उलझा कर बड़ी सफाई से अपना काम कर लेता है।
ऐसा ही कुछ हुआ छत्तीसगढ़ के दुर्ग शहर में दिनांक 25 जुलाई 2025 की सुबह दुर्ग रेलवे स्टेशन में नारायणपुर और ओरछा की तीन युवतियों और एक युवक के साथ संदिग्ध हालत में गिरफ्तार हुई दो ननों को आज एन आई ए कोर्ट से जमानत मिल गई और आज दिनांक 02 अगस्त 2025 को शाम 4 : 00 बजे के लगभग दुर्ग जेल से उनकी रिहाई हो गई पिछले तीन दिनों से दुर्ग जेल में जबरदस्त गहमागहमी रही। केरल से बड़े बड़े नेताओं , सामाजिक कार्यकर्ताओं और मलयालम मीडिया की पूरी फ़ौज गिरफ्तार नन्स के सर्थन में दुर्ग में आकर जमी हुई थी और अपने सारे कनेक्शंस का उपयोग कर रही थी दुर्ग शहर के कुछ सेक्युलर नेता केरल के शिष्ट मंडल की सेवा में पूरी तरह से बिछ गए थे। आज जमानत आदेश के बाद केरल से आए सभी नेता विजई मुद्रा में थे और छत्तीसगढ़ शासन को धिक्कारते हुए आदेशात्मक लहजे में छत्तीसगढ़ सरकार को प्रकरण वापस लेने का सन्देश दे रहे थे।
ननों की गिरफ़्तारी से लेकर जमानत पर रिहाई तक इस पूरे प्रकरण में आप लोगों को सिर्फ सतही जानकारी मिली है लेकिन RCN पूरे विषय के हर तथ्य का गंभीर अन्वेषण किया है। RCN के इस बुलेटिन में आज आप उन सारे अनछुए विधिक पहलुओं को सुनेंगे और जानेंगे की सच को छपने का कैसा कुत्सित प्रयास किया जा रहा है हम आज आपके सामने ऐसे तथ्य ला रहे है जिन पर आज तक किसी ने प्रकाश नहीं डाला।
इस पूरे प्रकरण के तह में जाने बाद एक बात स्पष्ट रूप से समझ में आती है कि जादूगर की तरह दृष्टिभ्रम का खेल कर जनता का ध्यान इस प्रकरण के मूल विषय धर्मांतरण से हटाने के लिए सारा आडम्बर रचा जा रहे है। जमानत को अपनी बड़ी जीत घोषित करने वाले केरल के एक नेता मीडिया से क्या कह रहे थे सुनिए।
आपने सुना कितने विश्वास के साथ ये नेता कह रहे थे कि ये केस फ़र्ज़ी है। इस पर जब मैंने पूछा कि क्या कोर्ट ने निर्णय दे दिया है कि ये केस फ़र्ज़ी है ? तो उन्होंने मुझ से प्रश्न किया कि क्या आपने न्यायलय के आदेश पढ़ा है ? मेरे ना कहने पर उन्होंने ये भी कहा कि न्यायलय ने कहा है कि कोर्ट के आदेश में साफ़ साफ़ लिखा है कि इन आरोपियों पर जो भी इलज़ाम लगाए गए थे उनके समर्थन में पुलिस अथवा अभियोजन कोई भी सबूत नहीं दे पाए इसलिए इन्हे जमानत मिली।
इससे पहले कि हम न्यायलय का पूरा आदेश पढ़ें ये देखते हैं कि इन नेता जी के कथन में कितनी सच्चाई है ? न्यायलय के आदेश में पृष्ठ क्रमांक 8 में स्पष्ट लेख है .
The order granting bail shall not be construed as a reflection on the merits of the case, which shall be examined at the appropriate stage .
अर्थात जमानत के आदेश को प्रकरण के गुण दोष का आधार ना माना जाए क्यों की गन दोषों का परीक्षण उपयुक्त अवस्था में किया जाएगा
आपने देखा कि केरल के नेता किस तरह से न्यायलय के आदेश का miss interpretation ( भ्रामक व्याख्या ) कर रहे थे। इतना ही नहीं केरल से आई मिडिया टीम को अपनी सुविधा अनुसार जानकारी दे रहे थे और मेरे द्वारा पूछे गए विधिक बिंदुओं पर बौखला कर कैसे विषयांतर हो गए ?
अब आइये बात करते हैं न्यायलय के आदेश कि और जानते हैं कि केरल से आए इन क्रांतिकारियों की बात में कितनी सच्चाई है ? न्यायालय विशेष न्यायाधीश N I A अधिनियम द्वारा जमानत आवेदन क्रमांक 1639 / 2025 पर पारित आदेश दिनांक 01 / 08 /2025 इस प्रकार है।
Considering submission advanced by all sides in the light of Judgments/Orders of Hon'ble Suprme Court
and on perusal of the Case Diary, prima facie shows that the accused were arrested, the relevant
seizures of property were effected in accordance with law and statements of victims as well as
concerned individuals have been recorded, although charge-sheet has not been filed in the present
case. It transpires from the Case Diary that the registration of the FIR is primarily based on a mere
apprehension and suspicion of commission of an offence by the accused persons. In the arrest memo of
the accused persons, no previous record of their criminal history has been annexed. It is also pertinent
to mention here that in the Sr. No. 12 of Arrest Memo it has been mentioned that the accused persons
are not habitual offender or they are not falling under dangerous category or there is no apprehension
of absconding of the accused persons. It is also significant that the parents of the three victims have also
filed their affidavits stating that the accused persons/applicants have not allured or forced or coerced
their daughters for religious conversion or human trafficking. Out of the three major/adult victim girls,
the two victim girls in their statement before the Police under section 180 of B.N.S.S., 2023, deposed
that they have been followers of
8.
Christianity since childhood.
Moreover, there is no requisition from the Investigating Agency for custodial interrogation of the
accused persons. It is apparent that the investigation as well as the trial shall require a reasonable span
of time for completion. The Investigating Agency has not placed any material on record before the Court
to show how continued custody of the accused persons would be necessary for the investigation or ends
of justice.
Hence, this Court is of the opinion that the applicants/accused persons are entitled to be enlarged on
regular bail.
The order granting bail shall not be construed as a reflection on the merits of the case, which shall be
examined at the appropriate stage
Accordingly, the bail application under Section 483 of BNSS, 2023, filed by the applicants in connection
with Crime No. 60/2025, Police Station-GRP Bhilai, District-Durg (C.G.), for offences under Section 143 of
B.N.S., 2023 r/w Section 4 of the Chhattisgarh Dharma Swatantrya Adhiniyam, 1968, is Allowed and it is
ordered that if each applicant/accused executing bail bonds for a sum of Rs. 50,000/- with two sureties
of the like sum produced to the satisfaction of this Court with following conditions, they shall be
released on bail.
इस प्रकार न्यायलय द्वारा आरोपियन को 7 शर्तों के साथ सशर्त जमानत दी गई है।
न्यायलय के आदेश के पृष्ठ क्रमांक 7 के अंत में लेख है –
Out of the three major/adult victim girls,the two victim girls in their statement before the Police under section 180 of B.N.S.S., 2023, deposed that they have been followers of Christianity since childhood.
अर्थात तीन वयस्क पीड़ित लड़कियों में से दो ने B.N.S की धरा 180 , 2023 के तहत पुलिस के समक्ष दिए गए बयान में कहा है कि वे बचपन से इसे धर्म की अनुयायी हैं। ऐसे में क्या ये जांच का विषय नहीं होना चाहिए कि क्या इनके अभिभावक इनके जन्म से पहले ही धर्मांतण कर चुके थे ? क्या उन्होंने ईसाई धर्म अपनाने के लिए छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 1968 की धारा 5 के तहत नियमों का पालन करते हुए जिला मजिस्ट्रेट को सूचित कर धर्मांतरण किया था ? यदि इन लड़कियों के जन्म से पूर्व उनके अभीभावकों ने छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 1968 की धारा 5 के तहत नियमों का पालन करते हुए विधिवत धर्मान्तरण नहीं किया है तो ये लड़किया बचपन से ईसाई कैसे हो सकती हैं ?
तीसरी लड़की ने NDTV के रिपोर्टर को दिए साक्षात्कार में कहा है कि वो 6 – 7 वर्ष पूर्व ईसाई हो चुकि है वर्तमान में इस लड़की की उम्र क्या है और आज से 6 – 7 वर्ष पूर्व क्या वो बालिग थी ?
दूसरा क्या इस लड़की ने ईसाई धर्म अपनाने के लिए छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 1968 की धारा 5 के तहत नियमों का पालन करते हुए जिला मजिस्ट्रेट को सूचित कर धर्मांतरण किया है ?
इसी तरह केरल से आए एक अन्य नेता ने मेरे प्रश्न का क्या उत्तर दिया सुनें।
जब मैंने इनसे पुछा की क्या आपने FIR क्वेश करने के लिए उच्च न्यायलय में धरा 482 के तहत आवेदन किया है तो उन्होंने कहा की ये काम छत्तीसगढ़ सरकार को करना चाहिए हमारे वार्तालाप के दौरान पीछे से कुछ कथित सेक्युलर नेता जय संविधान के नारे लगा रहे थे और ये केरल के क्रांतिकारी संवैधानिक व्यवस्थाओं की धज्जियाँ उड़ाते हुए धरा 582 के तहत FIR क्वेश करने के लिए सरकार को न्यायलय में आवेदन देने की उलटी गंगा बहाने की बात कर रहे थे।
इस पूरी घटना का लब्बोलुआब यही है कि अवैध रूप से करवाए जाने वाले धर्मांतरण के विषय से ध्यान भटकने के लिए सारा आडम्बर रचा जा रहा था बहरहाल अभी तो न्यायलय से जमानत मिला है आगे प्रकरण का चलना शेष है न्यायलय का निर्णय क्या आता है ये तो भविष्य के गर्भ में है। फिलहाल के लिए इतना ही लेकिन आने वाले समय में हम इस प्रकरण को लेकर नए अपडेट्स आप तक पँहुचाते रहेंगे तब तक के लिए आप राष्ट्रीय चेतना न्यूज़ से जुड़े रहें यू ट्यूब पर हमारे चैनल को सब्सक्राइब करें इंस्टाग्राम और फेस बुक पजे पर हमें लाइक और फॉलो करें। उत्तिष्ठ भारतः

