छत्तीसगढ़ की बहन बेटीयों के लिए मायके का मान सम्मान बनाए रखने का अगर कोई त्यौहार है तो वो है “तीजा’। उम्र चाहे 18 साल की हो या 88की जब मायके में पिता, भाई भतीज उन्हें तीजा लेने के लिए आते हैं तो उन बहन बेटियों के चेहरे पर एक खुशी की लहर देखने को मिलती है। तीजा मैं बहन बेटियों को घर लाने का सिलसिला यूं पोला के पहले शुरू हो जाता हैं, लेकिन करूं भात के दिन यानी तीजा के एक दिन पहले बहन बेटी मायके पहुंच ही जातीं हैं पर ऐसी कई सुहागीने भी है जिन्हें तीजा लेने कोई नहीं आता, क्योंकि न तो उनका मायका है और न कोई मायके सा प्यार देने वाला परिवार।
ऐसी बहनों के लिये शान्ता शर्मा मायके का प्यार लुटाती हैं छत्तीसगढ़ के पारंपरिक त्योहार तीजा के अवसर पर उन्होने तीजा का लुगरा उपहार में देकर यह अहसास कराया है कि वे भी मायके का लुगरा पहनकर अखण्ड सौहाज्ञवती होने के लिये तीजा उपवास करे पिछले दस साल से वे हर वर्ष
तीजा पर ग्यारह महिलाओं को उनके मायके की तरफ से भेंट देती है
इस वर्ष रूपाली महतारी गुड़ी बहुउद्देशीय संस्था भिलाई के द्वारा बी एम वाय उरला गांव में
तीजा के व्रत को उत्सव की तरह फुगड़ी,मटका फोड़,बिल्लस,गोटा,अटकन भटकन, छुवा छाई अन्य खेल के साथ स्नेह पूर्वक मनाया गया और तीजा उत्सव की भेंट लुगरा ( साड़ी) सौलह सिंगार, चावल,दाल,करेला टमाटर,केला आदि भेंट किये है। इसकी जानकारी संस्था की अध्यक्षा शांता शर्मा एवं संस्था की लीगल एडवाइजर निशा साहू ने न्यूज़ टीम को दी है
जिन बहन बेटियों के मायके से तीजा त्यौहार लेने के लिए कोई नहीं आता उन सभी को यह मायके का उपहार देकर एक नई परंपरा का निर्वहन संस्था द्वारा किया जा रहा है जिससे बहन बेटियों के चेहरे पर असीम खुशी देखी जा रही है।।

