ऑनलाइन दवाओं की बिक्री और ई-फार्मेसी के विरोध में आज दुर्ग जिले सहित पूरे देश में दवा दुकानों के शटर बंद रहे। AIOCD और छत्तीसगढ़ केमिस्ट्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन यानी CCDA के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर दवा व्यापारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
अचानक हुई इस बंदी का असर सीधे आम लोगों पर देखने को मिला। दूर-दराज के गांवों से दुर्ग पहुंचे मरीज और उनके परिजन दवाइयों के लिए इधर-उधर भटकते नजर आए। पाटन से आई तीजिया यदु और बेरला से आए मोहन लाल जैसे कई लोग हाथ में डॉक्टर की पर्ची लिए बंद मेडिकल दुकानों के सामने मायूस खड़े दिखाई दिए।
छत्तीसगढ़ केमिस्ट्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन के महासचिव अविनाश अग्रवाल ने आरोप लगाया कि बिना वैध जांच और डॉक्टर की पर्ची के ऑनलाइन दवाएं बेची जा रही हैं, जो लोगों की सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि बड़े कॉर्पोरेट घराने भारी डिस्काउंट देकर पारंपरिक मेडिकल व्यापार को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं।
वहीं जिला दवा विक्रेता संघ दुर्ग के सचिव दीपक बंसल ने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ व्यापार बचाने के लिए नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा के लिए भी है। उनका कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए नशीली और प्रतिबंधित दवाओं का दुरुपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
फिलहाल दवा व्यापारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक सरकार ई-फार्मेसी के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाती, उनका विरोध जारी रहेगा।

