आज ले चार पांच दिन पहिली रायपुर म छत्तीसगढ़ महतारी के प्रतिमा ला खंडित करे के घटना घाटिस , उखर तुरते बाद छत्तीसगढ़िया सेना अउ जोहर पार्टी के नेता अमित बघेल अउ उखर कार्यकर्त्ता मन के उग्र प्रदर्शन चालु होगे , प्रदर्शन ले ज्यादा एला उग्र भाखा में बयानबाजी कही सकत हन। ये जम्मो घटना क्रम अउ छत्तीसगढ़िया सेना के गतिविधि , के सन्दर्भ म , छत्तीसगढ़िया चिंतन , छत्तीगढ़ी अस्मिता , छत्तीसगढ़िया संस्कृति अउ छत्तीगढ़िया समाज के समग्र विकास के समीक्षा आज जरूरी हो गए हे।
सबले पहिली तो हम छत्तीगढ़िया चिंतन के बात करबो , अविभाजित मध्यप्रदेश म छत्तीसगढ़ के अपन अलग चिन्हारी बनाइन हमर पुरोधा गुरु घासीदास , पंडित सुन्दर लाल शर्मा , श्यामलाल चतुर्वेदी , मुकुटधर पांडेय , नरेंद्र देव वर्मा , खुमानलाल साव , रामचंद्र देशमुख , महा सिंह चंद्राकर , पदुमलाल पुन्नालाल बक्शी इन पुरोधा मन के सामजिक , साहित्यिक अउ सांस्कृतिक कारज ह मध्यप्रदेश ले अलग छत्तीसगढ़ के पहिचान बनाइस अउ इंखर अलावा पृथक छत्तीसगढ़ राज्य के कल्पना करने वाला हमर पुरखा मन के स्मरण घलव जरूरी हे जेमा पंडित सुंदरलाल शर्मा: हर सबले पहिली 1918 म एक अलग छत्तीसगढ़ राज्य के संकल्पना करिस अउ एखर बर जागरूकता फैलाईस ।
ठाकुर प्यारेलाल सिंह: हर 1924 म रायपुर कांग्रेस इकाई म एक अलग छत्तीसगढ़ प्रांत के मांग उठईस थी।
डॉ. खूबचंद बघेल: हर छत्तीसगढ़ के पिछड़ापन के मुद्दा ला उठईस अउ छत्तीसगढ़िया मनखे के हित म आवाज़ बुलंद करिस।
बैरिस्टर छेदीलाल: ह ठाकुर प्यारेलाल सिंह संग अलग छत्तीसगढ़ राज्य के मांग करिया प्रमुख आदमी रिहिस।
वामनराव बलिराम लाखे: ह ओ पाँच पांडव म रिहिस , जेमन रायपुर म सविनय अवज्ञा आंदोलन के नेतृत्व करे रिहिन अउ छत्तीसगढ़ राज्य के आंदोलन म घलव सक्रिय रिहिस।
1990 के दशक में, दुर्ग के कांग्रेस सांसद चंदूलाल चंद्राकर हर छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण मंच’ के नेतृत्व करिस अउ आंदोलन ला गति दिस चंदूलाल जी के आंदोलन ला छत्तीसगढ़ राज्य प्राप्ति बार पहिली जन आंदोलन कही सकत हन ये आंदोलन म चंदूलाल जी के सबसे बड़े ताकत रिहिस स्व दाऊ वासुदेव चंद्राकर , वासुदेव दाऊ ह छत्तीसगढ़िया अस्मिता अउ छत्तीसगढ़िया सम्मान के विचार ला धरातल दिस अउ दुर्ग जिला के राजनीती म छत्तीसगढियावाद ला व्यावहारिक रूप म लागू करके देखाइस त छत्तीसगढ़िया अस्मिता के विचार ला व्यवहार म बदलने वाला पुरोधा अउ छत्तीसगढ़िया वाद के असल प्रणेता निश्चित रूप म स्व वासुदेव दाऊ रिहिस।
1990 के दशक म पंडित विद्याचरण शुक्ल घलव छत्तीसगढ़ संघर्ष मोर्चा के बैनर म छत्तीसगढ़ राज्य बार आंदोलन चालु करिस।
कुल मिला के 1 नवम्बर सन 2000 म पृथक छत्तीसगढ़ राज्य के स्थापना होगे राज्य निर्माण के बाद राज्य के पहिली मुख्यमंत्री अजीत जोगी अउ तीसर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इन दुनो नेता छत्तीसगढ़िया वाद के झंडाबरदार के रूप म अपन छबि स्थापित करिन इखर अलावा 2003 से दुर्ग सांसद स्व ताराचंद साहू ह छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान के नारा बुलंद करिस अउ भारतीय जनता पार्टी ले बगावत कर छत्तीसगढ़ी स्वाभिमान मंच नाम के अलग राजनैतिक दल बनइस अउ अपन दल से लोकसभा चुनाव लड़के कांग्रेस अउ भा ज पा ला बरोबर के टक्कर दिस।
इंहा तक के आंदोलन के उद्देश्य रिहिस छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण , छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान अउ अस्मिता के रक्षा अउ छत्तीसगढ़िया समाज के उत्थान जेमा छत्तीसगढ़िया अउ गैर छत्तीसगढ़िया म संघर्ष अउ नफरत असन कोई व्यवस्था नई रिहिस।
अब चर्चा करबो वर्तमान उग्र छतीससगढिया वाद के। अमित बघेल के उग्र छत्तीसगढिया वाद ह महाराष्ट्र के राज ठाकरे पैटर्न के फोटो कॉपी हर ए राजनीती म भाखा के शालीनता के अभाव के संग संग चिंतन अउ विचारशीलता के आभाव घलव हे। इंखर आंदोलन म छत्तीसगढ़िया मनखे के समग्र विकास बार न तो चिंतन हे न कोई कार्यक्रम हे , बस गैर छत्तीसगढ़िया बार आक्रोस , नफरत अउ घृणा के भाव के भरोसा छत्तीसगढ़िया मनखे के सहानुभूति पाए के अडकट्टा रावण ला धरे के प्रयास दिखथ हे।
ये घृणा अउ द्वेष हिंसक हो जाय ओखर पहिली यहु विचार करना जरूरी हे कि मान ले गैर छत्तीसगढ़िया ला छत्तीसगढ़ म रेहे अउ रोजगार के अधिकार नई हे त फेर आज के नवा पीढ़ी के हमर लइका पढ़ लिख के बाहिर नौकरी अउ व्यापार करथ हें का उन सब ला छत्तीसगढ़ ले बाहिर रोजगार करके कोनो अधिकार नई हे।
अमित बघेल ह चिखला म कोहा फेंके के जउन खेल सुरु करे हे तेखर भविष्य के झलक अब दिखना सुरु हो गए हे वो अग्रसेन महराज अउ झूलेलाल बर अपशब्द के प्रयोग करिस तो एक झन अउ बईहा हमर पूज्य घासीदास बाबा पर वइसनहा सब्द निकालिस। तो का अब छत्तीसगढ़िया अउ गैर छत्तीसगढ़िया अइसने मातहीं ?
का आने वाला समय म हमर लइका मन अपन पढई लिखई काम धंधा ला छोड़ परदेसिया मन के पीछू पीछू तुतारी धरे घूमहिं ?
का परदेसिया मन ला गारी बकना , उंखर संग लड़ना , उंखर विरुद्ध आंदोलन करना , उंखर संग जंग छेड़ना इहि छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान हे ?
का इसने आंदोलन छत्तीगढ़िया मनखे ला , शिक्षित ,स्वस्थ , संपन्न अउ खुसहाल बना डरही ?
अउ मानले लरनाच हे त का लरई अइसने होथे ?
अरे अमित दाऊ
लरई लड़े के पहिली सिद्धांत हे दुसमन ला चुनौती दे के पहिली अपन किला अपन घर ला मजबूत करे जथे तें हर पहिली अपन घर ला त झाँक आज छत्तीसगढ़ के संस्कृति के का गत होगे हे , गाँव हेबे गंवई नंदा गे
नाचा गम्मत ,लिल्ला , गड़वा बाजा , मोहरी , बांस , खो खो , कबड्डी , फुगड़ी , गिल्ली , गेड़ी नंदा गे,
जांगर नंदा गे ,नांगर नंदा गे , बइला गाड़ी , भैंसा गाड़ा नंदा गे सुमेला जोता , आरि , कलारी , तुतारी सब नंदा गे !
भाई मोर , आज ले चालीस बछर पहिली मोर गाँव के एक झन राउत मात्र एक झन है देवारी म दारु पियत रिहिस साल भर म एक दिन त ओला गाँव भर के आदमी हांसय आज गली गली दारु बेचात हे गाँव के गाँव मन्दहा होत जात हे !! पहिली अपन गंवई ला बचा अपन संस्कृति ला बचा त फेर जांघ ला ठोकबे। अभी त अपन खुद के रेमट पोंछाये नई ये अउ दूसर ला सउचाय बार भीड़ गेस।
मैं पहिली भी केहेंव उग्र छत्तीसगढ़िया वाद के सबसे बड़े कमजोरी एमा छत्तीसगढ़िया मनखे के आर्थिक अउ सामजिक विकास के चिंतन के आभाव हे आज हम
ऊपर -ए -ऊपर एक नज़र देखथन तो स्पष्ट दिख जथे छत्तीसगढ़ के कुल व्यापार म छत्तीसगढ़िया मनखे के भागीदारी 5 % ले घलव कमती हे अइसन म हमर प्रयास ये होना चाहि कि छत्तीसगढ़ के व्यापार म छत्तीसगढ़िया मनखे के हिस्सा अधिक ले अधिक बढ़ाए जाय दूसर के लकीर ला छोटे करे के बजाय अपन लकीर ला बढ़ाए जाए।
आज ले 25 साल पहिली के रायपुर अउ आज के रायपुर म जउन बदलाव आये हे वो हर कल्पना ले बाहिर हे सन 2000 के पहिली के रायपुर म छत्तीसगढ़ के संस्कृति मम्हात रिहिस अउ आज के रायपुर है मेट्रो संस्कृति के रायपुर होंगे हे आम बोलचाल म छत्तीगढ़ी विलुप्त होगे हे अउ रिक्सा ठेला , फुटकर व्यापारी ले पार्किंग कर्मचारी , सिक्युरिटी गार्ड , लिफ्ट मैन , दूध वाले एमा कतका छत्तीसगढ़िया मनखे दिखथे , बड़े व्यापार म किराना , कपडा ओढ़ना , हार्डवेयर , बिल्डिंग मटेरियल , बिजली सामान , होटल , शादी घर , टेंट हॉउस , ईंटा भट्ठा , माइनिंग , लोहा सरिया , बिल्डर , सोना चांदी , बन्दूक बारूद्व , छोटे उद्योग , बड़े उद्योग , के अलावा एस ई सी एल , रेलवे , पी डब्लू डी , सिंचाई , आर ई एस , जंगल , नागीय निकाय असन सरकारी ठेका , म छत्तीसगढ़िया मनखे के कतका बखत हे ?
चलव रायपुर बिलासपुर भिलई कोरबा के बात झन करओ , कवर्धा ,धमतरी ,जगदलपुर नांदगांव ,खैरागढ़ , कवर्धा ,छुहीखदान , धमधा , गंडई , बेमेतरा , नगरी , पंडरिया , दाढ़ी , नवागढ़ ,बेरला , कोंडागांव , नारायणपुर , गीदम , सीपत , बलौदा बाजार , भाटापारा सन छोटे छोटे सहर अउ क़स्बा के व्यापार म छत्तीसगढ़िया मनखे के भागीदारी कतका हे तेला देखव अउ बिचार करव।
छतीसगढिया आदमी या ते खेती करथे या नउकरी या फेर बहुत छोटे व्यापार अइसन म गैर छत्तीसगढ़िया ले जले अउ हिजगा करे के जगह उंखर बराबरी करना अउ सपन्न होना ज्यादा जरूरी हे।
अपन नेतागिरी चमकाए के चक्कर म बड़े बड़े गोठ हर नेता के चिन्हारी हे सही नेता उहि होही जउन छत्तीसगढ़िया मनखे के आर्थिक विकास अउ छत्तीसगढ़ के वयापार म छत्तीसगढ़िया मनखे के अधिकतम भागीदारी तय कारवाही नहीं ते छतीसगढिया वाद के नाव लेके छतीसगढ़ के मुख्यमंत्री बनने वाला अजीत जोगी अउ भूपेश बघेल के राज म राजनैतिक लाभ पाने वाला व्यापारी मन म के झन छत्तीसगढ़िया रिहिन तेला कोई गन के बता दै सब ईमन चीमन निझावन एबर ढेबर भाटिया ढिल्लोंच मन तो अरबपति बनीन। कुल जमा बात अतके हे के छत्तीसगढ़िया अस्मिता अउ सम्मान के आंदोलन अनिवार्य हे फेर एखर बर कोनो नफरत अउ हिंसा फैलाए बिगर छत्तीसगढ़ के व्यापार म छत्तीसगढ़िया मनखे के हिस्सादारी ला बढ़ाना जरूरी हे। त आओ हम सब झन मिल के जाती पाती के भेद ले ऊपर उठ के शिक्षित अउ संपन्न छत्तीसगढ़ी समाज के निर्माण बर जांगर चलान अउ नवा छत्तीसगढ़ी समाज ला खड़े करे के बाना उठावन।
जय छत्तीसगढ़ महतारी

