बीएसपी के प्लॉट शॉप No 182, New Civic Centre Bhilai Distt. Durg (C.G.) के अवैध कब्जाधारियों Plot/Shop No 182, New Civic Centre Dinesh Kumar Singhal के विरूध्द संपदा न्यायालय द्वारा पारित डिक्री आदेष 25 मार्च को जारी कर प्रवर्तन अनुभाग को अवैध कब्जाधारियों की बेदखली के लिए अधिकृत किया था
आदेष के अनुपालन में प्रवर्तन अनुभाग की टीम द्वारा दिनाॅक 2 अप्रैल को प्लाट/षाॅप क्रमाॅक 182 न्यू सिविक सेन्टर के अवैध कब्जाधारियों के बेदखली कार्यवाही करने, पुलिस बल थाना कोतवाली महिला पुलिस बल सहित एवं कार्यपालक मजिस्ट्रेट ढ़ाल सिंह बिसेन की उपस्थिति में की गयी। कार्यवाही के दौरान कब्जाधारियों को परिसर से बेदखल कर शॉप के समस्त बाहरी दरवाजां को यथावत स्थिति में ही में सील किया गया। इस दौरान किसी भी प्रकार के सामानों की जप्ती नही बनायी गयी तथा कार्यवाही के दौरान उपस्थित गवाहों की मौजूदगी में पंचनामा तैयार किया गया। साथ ही विद्युत अभियाॅत्रिकी विभाग के कार्मिको द्वारा प्लाट शॉप का विद्युत विच्छेद किया गया।
दुकान क्रमांक 182, न्यू सिविक सेंटर, जसराज कोचर को 30 वर्ष के लिए लीज के तहत आवंटित की गई थी। जसराज कोचर ने दिनेश कुमार सिंघल, जो वर्तमान में भिलाई स्टील सिटी चैंबर ऑफ कॉमर्स के महासचिव है, के नाम से पावर ऑफ अटॉर्नी निष्पादित किया था, जिसके आधार दिनेश कुमार सिंघल दुकान पर काबिज था। लीज की अवधि 29.09.2012 को समाप्त हो गई थी।
लीजधारक द्वारा आगामी 30 वर्ष की अवधि के लिए लीज का नवीनीकरण न करवाने के कारण 2015 में दुकान का आवंटन बीएसपी द्वारा रद्द कर दिया गया था। दुकान से अनाधिकृत कब्जाधारियों को बेदखल करने के लिए 2016 में सम्पदा न्यायालय में मामला भी दायर किया गया था।
इस बीच जसराज कोचर की मृत्यु 2015 में हो गई। दुकान के कब्जेदार एवं पावर ऑफ अटॉर्नी धारक ने मृत्यु की घटना को बीएसपी और दुर्ग एवं उच्च न्यायालय से छुपाया था।
संपदा न्यायालय के आदेश को दिनेश सिंघल ने दुर्ग न्यायालय में चुनौती दी थी। दुर्ग न्यायालय ने 2019 के आदेश के तहत संपदा न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा।इसके बाद दिनेश सिंघल ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में दुर्ग न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी । उच्च न्यायालय ने फरवरी 2025 को पारित आदेश के तहत याचिका को खारिज कर दिया था, जिसके चलते संपदा न्यायालय का आदेश प्रभावी हो गया।दुकान पर 77 लाख 52 हजार का बिल बकाया था, जिसका आवंटी द्वारा 2014 से भुगतान नहीं किया गया था और सिर्फ बिजली बिल का भुगतान किया जा रहा था।
कार्यवाही के दौरान ज्ञानचंद जैन द्वारा भारी विरोध करते हुए बाॅधा उत्पन्न की गयी ’ साथ ही उनके द्वारा अधोहस्ताक्षरी तथा नगर सेवा विभाग के अधिकारियों के बारे उॅचे स्तर पर षिकायत करने की बात कही है।

