भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है ! विश्व का सर्वश्रेष्ठ लोकतंत्र क्यों नहीं ?

पिछले दो दशकों में समय की रफ़्तार में जो तीव्रता आई है वो इससे पहले कभी देखि नहीं गई संचार क्षेत्र में नित नई क्रांतियों से समाज में भी क्रांतिकारी परिवर्तन आए हैं हमारा रहन सहन ,  खान पान , साहित्य , संस्कृति , सिनेमा , खेलकूद सब कुछ बदल गया है । कुछ कलाएं विलुप्त हो गई हैं और कुछ विलुप्ति के कगार पर हैं। गावों की गलियों में युद्ध गीत सुनाने वाले भाट और चारण , रस्सियों पर चलने वाले नट , बन्दर और भालू का नाच दिखाने वाले ,  सांप और नेवले का खेल दिखाने वाले मदारी अब नहीं दिखते। नई पीढ़ी को इन लुप्तप्राय कलाओ से वाकिफ कराना हमारा दायित्व है इस लिए आज हम चर्चा करेंगे मदारी के खेल की । मदारी के खेल में मदारी के साथ कम से कम एक जमूरा होता है। मदारी शहर या गांव के भीड़ भरी जगह पर मजमा लगता है डमरू बजा कर कुछ तुक बंदियाँ कर कुछ नारे लगा कर एक कोने में एक खूंटे से नेवला बांधता है दुसरे कोने में साँप का पिटारा रखता है और सांप नेवले की लड़ाई दिखने का वादा कर भीड़ एकत्रित करता है फिर बीच में खड़ा हो कर रोग ऋण शत्रु से मुक्ति के लिए , व्यापार , गृहस्थी , परीक्षा और प्रेम में सफलता के लिए , कोई हुई ताकत और जवानी के लिए तावीज बेचने लगता है , तावीज बेचने के बाद सांप का पिटारा और नेवले को उठता है और निकल जाता है , ये सिलसिला वर्षों से चलता आ रहा है मदारी तावीज बेच रहा है और लोग तावीज खरीद रहे हैं तावीज खरीदने वाला आदमी तावीज से अपनी मन्नत पूरी होने की आस में इतना मगन होता है कि वो आज तक कभी पूछ ही नहीं पाया कि सांप और नेवले की लड़ाई कब होगी इसलिए आज भी जो जितने ज्यादा तावीज बेच ले वो उतना बड़ा मदारी कहलाता है।

 आज की पीढ़ी ने तो कभी मदारी का खेल देखा ही नहीं तो मैं उनको बताना चाहूंगा कि  कि ये साँप नेवले की लड़ाई  , मदारी और जमूरे का खेल आज भी चल रहा है और बहुत बड़े प्लेटफार्म पर चल रहा है मदारी आज भी आ रहे हैं , तावीज आज भी बिक रहे हैं बस मदारीयों का स्तर बहुत ऊँचा हो गया है आज का मदारी , गधे या खच्चर पर नहीं चलता , बैल गाड़ियों या बसों में नहीं चलता दिन में आठ दस मजमे नहीं लगाता सप्ताह , महीने या साल में भी मजमा नहीं लगता , सांप और नेवला नहीं दिखता और तावीज के बदले पैसे भी नहीं मांगता। आज का मदारी , आज का मदारी कभी सैकड़ों जमूरों के साथ पद यात्रा करता है ,कभी हवाई जहाज , हेलीकाप्टर , और बुलेटप्रूफ गाड़ियों में चलता है, पांच साल में एक बार मजमा लगता है , सांप और नेवले की जगह संविधान , मजहब , जाती , क्षेत्रीयता , बेरोजगारी , गरीबी , पकिस्तान , चीन से देश की सुरक्षा पर खतरे का डर दिखता है , इस खतरे से बचाने वाले तावीज के नाम पर पैसे , कम्बल , साडी , चांवल और शराब बांटता है तावीज के बदले वोट मांगता है , वोट बटोरता है , संविधान , मजहब , जाती , क्षेत्रीयता , बेरोजगारी , गरीबी , देश की सुरक्षा , की पोटली बनता है और निकल जाता है दुसरे शहर में मजमा लगाने !!

हम सब बड़े गर्व से कहते हैं कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है लेकिन अफ़सोस का विषय है हम ये नहीं कह सकते कि भारत विश्व का सर्वश्रेष्ठ लोकतंत्र है। स्वतंत्रता के 77 वर्षों के बाद भी इस देश में राजनैतिक दल जाती धर्म के आधार पर टिकटें बांटते हैं और पैसों के बल चुनाव लड़ते हैं । स्वतंत्रता के 77 वर्षों के बाद भी मतदाता जाती , धर्म , क्षेत्रीयता , पैसे , कम्बल , साडी , चांवल और शराब के अधार पर वोट देते हैं।
जिस दिन इस देश का मतदाता के मतदान का मूल आधार राष्ट्र प्रथम होगा दूसरा आधार राजनैतिक दलों की नीति , सिद्धांत और विचारधारा होगा और अंतिम आधार प्रत्याशी की योग्यता होगा उस दिन हर राजनैतिक दल के नीति सिद्धांत और विचारधारा में राष्ट्र प्रथम की अवधारणा होगी और हर राजनैतिक दल योग्य प्रत्याशी को टिकिट देने पर मजबूर होगा और उसी दिन भारत विश्व का सर्वश्रेष्ठ लोकतंत्र होगा। जिस दिन भारत विश्व का सर्वश्रेष्ठ लोकतंत्र होगा उस दिन भारत विश्व की महा शक्तियों में एक होगा और उसी दिन भारत सही मायनों में विष गुरु होगा।

आइये आज से आप और हम भारत को विश्व का सर्वश्रेष्ठ लोकतंत्र बनाने के लिए इक सार्थक अभियान शुरू करें। प्रण करें की अबोध मतदाताओं को मतदान का महत्त्व और मत का मूल्य समझाएं सपथ लीं कि सप्ताह में कम से कम दस मतदाताओं को जागरूक करने का प्रयास करेंगे और उनसे कहेंगे कि वे अन्य दस लोगों को जागरूक करें बस इसी तरह ज्योत से ज्योत जलाते चलें आज नहीं तो कल हमारी पीढ़ी नहीं तो हमारे बाद की पीढ़ी वो नहीं तो उनके बाद की पीढ़ी तो निश्चित रूप से विश्व के सर्वश्रेष्ठ लोक तंत्र के नागरिक के रूप में पहचानी जाएगी।

By editor