सावन के पहले सोमवार देवबलोदा शिव मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, रहस्यों से घिरा मंदिर बना आकर्षण का केन्द्र

सावन का पावन महीना शुरू होते ही पूरे अंचल में शिवभक्ति की गूंज सुनाई दे रही है।
आज पहले सोमवार को दुर्ग, भिलाई और आसपास के क्षेत्रों के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है।

विशेष आकर्षण का केन्द्र बना है — देवबलोदा स्थित प्राचीन शिव मंदिर,
जहां सुबह से ही शिवभक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं।
नागर शैली में बने इस मंदिर की खासियत सिर्फ इसकी वास्तुकला ही नहीं,
बल्कि इससे जुड़ी रहस्यमयी लोक कथाएं और ऐतिहासिक मान्यताएं भी हैं।

माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 13वीं शताब्दी में कल्चुरी राजाओं ने करवाया था।
शिवलिंग मंदिर के गर्भगृह में लगभग तीन फीट नीचे स्थापित है, और
मंदिर के बाहर स्थित कुंड के बारे में कहा जाता है कि उसके भीतर से एक गुप्त मार्ग आरंग तक जाता है।

लोककथा के अनुसार, मंदिर का निर्माण करने वाला शिल्पी मंदिर का गुंबद अधूरा छोड़ गया,
और ऐसी भी मान्यता है कि मंदिर निर्माण के समय लगातार छह महीने तक रात ही रात थी
हालांकि खगोल विज्ञान में इसका कोई उल्लेख नहीं मिलता।
जानकारों का मानना है कि निर्माण कार्य की लंबी अवधि को लोगों ने ‘छमासी रात’ की कथा में बदल दिया।

एक अन्य मान्यता के अनुसार, शिल्पकार शिव भक्ति में इतना लीन हो गया था कि उसे अपने शरीर की सुध भी नहीं रही,
और वह नग्न अवस्था में ही दिन-रात मंदिर निर्माण में जुटा रहा।
कहा जाता है कि एक दिन उसकी पत्नी ने उसे होश में लाने के लिए स्वयं को उसके सामने नग्न कर दिया
यह देख शिल्पी की तपस्या भंग हुई और वह वहीं कार्य अधूरा छोड़कर चला गया।

आज सावन के पहले सोमवार पर यह मंदिर आस्था, इतिहास और रहस्य का त्रिवेणी संगम बना रहा,
जहां श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना करते देखे गए।

By editor