दुर्ग नगर निगम में आज उस वक्त हाईवोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जब महापौर अलका बाघमार ने मंडी बोर्ड और एरिगेशन विभाग के अधिकारियों को अपने कक्ष में बुलाकर जमकर फटकार लगाई। बताया जा रहा है कि महापौर ने अधिकारियों को करीब चार घंटे तक अपने कक्ष में बैठाकर रखा, जिसके बाद निगम परिसर में हड़कंप मच गया।
मामला इतना बढ़ गया कि किसी ने चुपके से पुलिस को सूचना दे दी। पुलिस के पहुंचने के बाद ही अधिकारी कक्ष से बाहर निकल पाए। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान निगम कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
महापौर अलका बाघमार का आरोप है कि शहर में होने वाले लोकार्पण और भूमिपूजन कार्यक्रमों की जानकारी उन्हें जानबूझकर नहीं दी जाती। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि कार्यक्रम में बुलाना नहीं है, तो निमंत्रण कार्ड में उनका नाम भी नहीं छापा जाए।
महापौर ने यह मुद्दा एक दिन पहले खुले मंच से शिक्षा मंत्री और दुर्ग शहर विधायक गजेंद्र यादव के सामने भी उठाया था। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को सूचना देना अधिकारियों की जिम्मेदारी है, लेकिन उन्हें सिर्फ बुके लेकर खड़े रहने तक सीमित किया जा रहा है।
वहीं अधिकारियों को घंटों बैठाए रखने के मामले में सफाई देते हुए महापौर ने कहा कि बिना NOC शहर में काम किए जा रहे हैं और टेंडर प्रक्रिया में सरकार को चुना लगाया जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि गड़बड़ी और मनमानी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

