दुर्ग जिले में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां आरटीई यानी राइट टू एजुकेशन फंड में भारी अनियमितता और गबन के आरोप लगे हैं। इस मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर पर भी तूल पकड़ लिया है।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग यानी NCPCR ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए दुर्ग कलेक्टर को नोटिस जारी किया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जिले के कुछ निजी स्कूलों ने फर्जी छात्र संख्या दिखाकर और दस्तावेजों में हेरफेर कर सरकारी राशि का गलत तरीके से फायदा उठाया।

बताया जा रहा है कि आरटीई योजना के तहत सरकार निजी स्कूलों को आर्थिक सहायता देती है, ताकि गरीब और जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त शिक्षा मिल सके। लेकिन इसी योजना में कथित तौर पर बड़े स्तर पर गड़बड़ी किए जाने की शिकायत ई-बाल निदान पोर्टल पर दर्ज कराई गई थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग के निदेशक वी. रामानधा रेड्डी ने दुर्ग कलेक्टर को 20 दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। वहीं शिकायतकर्ता ने जांच में सहयोग की बात कही है, लेकिन सुरक्षा कारणों से अपनी पहचान गोपनीय रखने की मांग भी की है।

अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर बच्चों के अधिकारों और शिक्षा के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग कैसे हुआ… और इस पूरे मामले में किन-किन लोगों की भूमिका सामने आती है। फिलहाल सभी की नजर प्रशासनिक जांच पर टिकी हुई है।

By editor