स्वच्छता के नाम पर दुर्ग में बड़ा खेल?

दुर्ग शहर में स्वच्छता के दावों की पोल खोलती एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। शहर को साफ-सुथरा दिखाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि फिजाओं में अब कचरे का जहरीला धुआं घुल रहा है।

नगर निगम का SLRM सेंटर, जहां कचरे की वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेसिंग होनी चाहिए, अब लापरवाही और अव्यवस्था का प्रतीक बनता जा रहा है। जानकारी के मुताबिक सेंटर की कई प्रोसेसिंग मशीनें लंबे समय से बंद पड़ी हैं, जिसके चलते कचरे का ढेर लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात इतने खराब हैं कि कचरे को खुलेआम जलाया जा रहा है।

सबसे बड़ी बात यह है कि यह सब उस इलाके में हो रहा है, जहां कलेक्टर और एसपी जैसे बड़े अधिकारियों के बंगले मौजूद हैं। यानी VIP इलाका भी इस जहरीले धुएं से अछूता नहीं है।

एक तरफ दीवारों पर स्वच्छता अभियान के बड़े-बड़े स्लोगन लिखे जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी NGT के नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।

CMHO ने भी चेतावनी दी है कि कचरे से निकलने वाला जहरीला धुआं लोगों के फेफड़ों, आंखों और त्वचा पर गंभीर असर डाल सकता है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह धुआं बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

अब सवाल यह उठ रहा है कि स्वच्छता सर्वेक्षण 2026 की तैयारी आखिर जमीन पर हो रही है या सिर्फ पेंट, पुताई और दिखावे तक सीमित रह गई है।

By editor