दुर्ग जिले के हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र से शिक्षा के नाम पर एक बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है, जिसने अभिभावकों के भरोसे को गहरी चोट पहुंचाई है।

बीएनएस स्कूल पर आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों को CBSE बोर्ड का झांसा देकर बच्चों का दाखिला लिया, जबकि हकीकत में यहां पढ़ाई छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल के पाठ्यक्रम के अनुसार कराई जा रही थी।

बताया जा रहा है कि इस स्कूल में वर्तमान में 1000 से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं। स्कूल के प्रचार-प्रसार और विज्ञापनों में इसे सीबीएसई संबद्ध संस्था बताया गया था, जिसके चलते सैकड़ों अभिभावकों ने भारी फीस देकर अपने बच्चों का दाखिला कराया। लेकिन जांच में खुलासा हुआ कि स्कूल के पास सीबीएसई की कोई मान्यता नहीं है।

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद अभिभावकों में भारी आक्रोश है। अपने बच्चे का बेहतर भविष्य संवारने का सपना लेकर आए पालकों को अब खुद को ठगा हुआ महसूस हो रहा है। एक अभिभावक ने साफ तौर पर कहा कि उन्होंने सीबीएसई स्कूल समझकर मोटी फीस भरी, लेकिन अब सच्चाई सामने आने के बाद उनका भरोसा पूरी तरह टूट चुका है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए स्कूल प्रबंधन को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया है। जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा ने पुष्टि की है कि शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए स्कूल को नोटिस भेजा गया है और प्रबंधन को 8 मई तक अपना जवाब प्रस्तुत करने का समय दिया गया है।

साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि पालकों द्वारा की गई शिकायतों की विस्तृत जांच जारी है, और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने न केवल एक स्कूल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र में निजी स्कूलों की संबद्धता और पारदर्शिता को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बच्चों के भविष्य के साथ हुए इस कथित धोखाधड़ी पर प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है, और क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी या नहीं।

By editor