छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला के समोदा गांव में अवैध अफीम की खेती का मामला अब राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। इस पूरे प्रकरण में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल खुद मौके पर पहुंचे और खेत का निरीक्षण करते हुए सीधे सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया।
दरअसल, जेवरा चौकी क्षेत्र में 6 मार्च को पुलिस ने अवैध रूप से की जा रही अफीम की खेती पर कार्रवाई की थी। इसी के बाद आज पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समोदा गांव पहुंचे और मौके का जायजा लिया। निरीक्षण के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
भूपेश बघेल ने कहा कि पहले दूसरे राज्यों से नशीले पदार्थ छत्तीसगढ़ पहुंचते थे, लेकिन अब स्थिति ऐसी हो गई है कि छत्तीसगढ़ में ही नशे की खेती की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में नशे का अवैध कारोबार लगातार बढ़ रहा है और सरकार इस पर नियंत्रण करने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है।
उन्होंने कहा कि अफीम का पौधा पूरी तरह नशे के कारोबार से जुड़ा होता है। इसके फल पर चीरा लगाकर अफीम निकाली जाती है, वहीं उससे डोडा तैयार किया जाता है और इसके बीज से खसखस निकलता है। यानी इस पौधे का हर हिस्सा अवैध कारोबार में उपयोग किया जाता है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस पूरे मामले को लेकर वे विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव लाएंगे। उनका कहना है कि हैरानी की बात यह है कि होलिका दहन के लिए लकड़ी लेने गए गांव के बच्चों ने सबसे पहले इस अवैध खेती का पता लगाया, जबकि पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी थी।
भूपेश बघेल ने इसे एक बड़े रैकेट का हिस्सा बताते हुए कहा कि इस मामले में प्रभावशाली लोगों की भूमिका की जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़े एक बड़े नेता का नाम सामने आ रहा है और उनके प्रभाव के कारण कार्रवाई में देरी हो रही है।
इधर इस पूरे मामले में दुर्ग रेंज के आईजी ने कहा है कि अवैध अफीम की खेती के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और नार्कोटिक्स विभाग की टीम की मदद से अवैध फसल का नष्टीकरण किया जाएगा और पूरे नेटवर्क की जांच की जाएगी।
फिलहाल समोदा गांव में सामने आए इस मामले ने छत्तीसगढ़ की राजनीति को गरमा दिया है। एक ओर विपक्ष सरकार पर सवाल उठा रहा है, तो वहीं प्रशासन अब पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटा हुआ है।

