इज्ज़त का लूटा जाना संभव ही नहीं है !!

उत्तिष्ठ भारतः , मैं हूँ राजीव चौबे और आप देख रहे हैं राष्ट्रीय चेतना न्यूज़, आर सी एन में आपका स्वागत है आज के विश्लेषण के  विषय हैं  शब्द कोष के कुछ शब्द और बोलचाल की भाषा में उनके प्रयोग। 
      एक शब्द है ‘ लूट ‘ ,  अब जानते है इसका अर्थ ,  लूट याने की बलपूर्वक किसी की संपत्ति को हथियाना ये मान लीजिये  छगन ने जगन की मोटर साइकिल लूट ली इस स्थिति मोटरसाइकिल अब छगन की हो गई इसे थोड़ा और विस्तार से समझते हैं छगन और जगन के पास आठ आठ छतरियां हैं छगन ने जगन से दो छतरियां लूट ली अब जगन की छतरियां कम हो गई और छगन की छतरियां बढ़ गई।  अर्थात जिस किसी भी वस्तु की लूट होती है लुटने वाले के पास वो कम हो जाती है और लूटने वाले के पास वो बढ़ जाती है।
      अब शब्द कोष के कुछ और शब्दों को समझने का प्रयास करते हैं , इज्ज़त , आबरू और अस्मत इज़्ज़त  का अर्थ ‘सम्मान’, ‘प्रतिष्ठा’, ‘गरिमा’ और ‘मर्यादा’ होता है。 यह शब्द उत्तर भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश की संस्कृतियों में बहुत महत्व रखता है。 यह किसी भी व्यक्ति की सामाजिक स्थिति और दूसरों की नजरों में उसके आदर को दर्शाता है。इसके मुख्य पहलू निम्नलिखित हैं:अर्थ: सम्मान, प्रतिष्ठा, मान, मर्यादा, और सामाजिक स्वीकृती ,  यह शब्द मूल रूप से अरबी भाषा के शब्द ‘izzat से आया है, जिसे फारसी में भी अपनाया गया था और बाद में यह उर्दू का हिस्सा बन गया ,   इज्ज़त , आबरू और अस्मत  शब्दों के अर्थ तो हम जान गए अब समझते है कोई मनुष्य इज्जत आबरू कैसे प्राप्त करता है , दरअसल मानव समाज में मान सम्मान इज़्ज़त शब्द भाववाचक संज्ञा है और  मनुष्य अपने सद्कर्मों से समाज में इज्जत प्राप्त करता है इसका मतलब सज्जन की इज्जत होती है और दुर्जन की इज्जत नहीं होती। 
ये तो हो गया इज्जत कमाने का तरीका अब इज्जत गंवाने या लुटाने की बात करें तो ये तय है कि सद्कर्मों से यदि इज्जत कमाई जाती है तो दुष्कर्मों से इज्जत गंवई जाती होगी अर्थात बुरे कर्मों से समाज में मनुष्य की इज्जत घटती है , खोती है , या लुटती है। 
   अब  चर्चा करते हैं बोलचाल की भाषा में इज्जत और लूटने जैसे शब्दों के प्रयोग पर चर्चा करते हैं ,  ‘ इज्जत लुटना ‘ इस शब्द युग्म का प्रयोग हमारे बोलचाल की भाषा में कैसे होता है ? हमारे देश में जब भी किसी स्त्री के साथ अनाचार की घटना होती है तब सहज रूप से कहा जाता है कि फलां महिला की इज्जत लुट गई , या आबरू लुट गई , या फिर अस्मत लुट गई  ! 
सामूहिक बलात्कार की घटना में चार लोगों ने मिलकर एक मासूम की इज्जत लूट ली !
 दरिंदे ने डरा धमका कर बेबस की इज्जत लूट ली ! 
खेत में काम करने गई महिला एक दरिंदे के हाथों अपनी आबरू लुटा बैठी ! 
अख़बारों की सुर्खियां होती हैं , फलां ने फलां की इज्जत लूट ली , फिल्मों के संवाद होते हैं बलात्कारी ने एक मासूम की इज्जत लूट ली ! 
एक प्रश्न दशकों से मेरे मन को कचोटता है की बलात्कार की घटना में एक दरिंदे द्वारा पीड़िता की इज्जत लूटना शब्द के प्रयोग का सीधा सीधा अर्थ होता है पीड़िता की इज्जत का घटना और दरिंदे अपराधी की इज्जत बढ़ना , तो क्या हमर समाज ये मानता है कि जिस स्त्री के साथ बलपूर्वक अनाचार किया गया हो उसकी इज्जत कम हो जाती है ? और फिर जिसने इज्जत लूट ली तो क्या उसकी  इज्जत और बढ़ गई 
पिछले कई सालों से इस देश के  बड़े बड़े भाषा विद  , समाज शास्त्री , विधि विशेषज्ञ , सोशल एक्टिविस्ट , फेमिनिस्ट किसी के दिमाग में ये नहीं आया कि जिस महिला के साथ बलात्कार हुआ है उसकी इज्जत कैसे लुट गई ? एक तो पीड़िता अपने साथ हुए भयानक शारीरिक और उससे कहीं अधिक मानसिक प्रतड़ना को झेले और फिर समाज कहे कि उसकी इज्जत लूट गई ! क्या कभी किसी को ये नहीं लगा कि दुष्कर्म के मामले में इज्जत तो पीड़िता की नहीं बल्कि दुष्कर्मी की लुटती है ?  बावजूद इसके दुष्कर्म की घटना पर हम बड़ी सहजता से कह देते हैं कि फलां की इज्जत लुट गई ! समाज में बड़ी  सहज मान्यता बन गई है बड़ी सहजता से कह देते हैं लड़कों का क्या है ? आखिर इज्जत तो लड़की की गई न ! इसके मायने क्या हैं  ?? जिसने जघन्य अपराध किया उसका कुछ नहीं गया और जिस बेचारी के साथ दुष्कृत्य हुआ उसकी इज्जत चली गई !
आप मैं और ये पूरा समाज किस आधार पर तय करता है कि बलात्कार पीड़िता की इज़्ज़त चली गई।  कई घटनाओं में बलात्कार के बाद पीड़िता की हत्या कर दी जाती है तब भी समाज बड़ी सहजता से कह देता है जान भी गई और इज़्ज़त भी इसका मतलब पीड़िता अपनी जान देकर भी अपनी इज़्ज़त नहीं बचा पाई ? 
जैसा की मैंने पहले बताया  शब्द मूल रूप से अरबी भाषा के शब्द ‘izzat से आया है, जिसे फारसी में भी अपनाया गया था और बाद में यह  उर्दू का हिस्सा बन गया ,  दरअसल भारत के हिंदी भाषी क्षेत्रों में बोलचाल की भाषा में हिंदी और उर्दू का जबरदस्त मिश्रण है उर्दू के ज्यादातर शब्द  फ़ारसी से लिए गए हैं वहीँ हिंदी के ज्यादार शब्द संस्कृत से आते हैं अब यहाँ समझने वाली बात ये है की हर भाषा में उस संस्कृति की गंध होती है जहाँ उस भाषा का जन्म होता है जैसे की परिष्कृत हिंदी पाली और संस्कृत अदि भाषाओँ में आप को भारतीय संस्कृति की गंध मिलेगी वैसे ही उर्दू में आपको अरबी और फ़ारसी संस्कृति की गंध मिलती है इसी लिए हिंदी में रेप  के लिए , महिला का साथ , दुराचार , अनाचार , बलात्कार जैसे शब्दों का प्रयोग होता है क्यों कि भारतीय संस्कृति ये कभी स्वीकार नहीं करती कि बलात यौन शोषण से स्त्री का सम्मान घटता है ! जबकि अरबी और फ़ारसी संस्कृति के अनुसार रेप का मतलब खबातीन की इज्जत लुटना होता है। बावज़ूद इसके आज देश के पूरे हिंदी भाषी भूभाग में ब्लात्कार पर पीड़िता की इज्ज़त लुटना जैसे शब्द का प्रयोग आमतौर पर किया जाता है । 

राष्ट्रीय चेतना न्यूज़ के सभी दर्शकों से मेरा निवेदन है , आइये समाज  को जागृत करने का प्रयास करें और बलात्कार जैसे जघन्य अपराध पर की पीड़िता की इज़्ज़त लुटने जिसे शब्द को भारतीय शब्दकोष से ही विलोपित करने का प्रयास करें। 
आज के लिए इतना ही अगली किश्त में फिर विश्लेषण करेंगे एक नए विषय का  तब तक के लिए अनुमति दें।  यू ट्यूब पर हमारे चैनल को सब्स्क्राइब करें फेसबुक और इंस्टाग्राम पर हमें लाइक और फॉलो करें आपका बहुत बहुत आभार।  उत्तिष्ठ भारत

By editor