छत्तीसगढ़ के सेलूद गांव से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने आधुनिकता की चकाचौंध के बीच हमारी जड़ों की याद ताजा कर दी।

यहां एक दूल्हे ने अपनी शादी को खास बनाने के लिए ऐसा रास्ता चुना, जो अब धीरे-धीरे इतिहास बनता जा रहा है।

जहां आजकल शादियों में लग्जरी कारें, डीजे और भव्य इंतजाम आम हो गए हैं…
वहीं इस दूल्हे ने परंपरा को प्राथमिकता देते हुए बैलगाड़ी पर सवार होकर अपनी बारात निकाली।

जी हां… बैलगाड़ी पर सजी-धजी बारात… बिना किसी तेज आवाज, बिना डीजे के शोर-शराबे के…
सिर्फ सादगी, संस्कृति और परंपरा की खुशबू के साथ।

जैसे ही बैलगाड़ियों का यह अनोखा काफिला गांव की गलियों से गुजरा…
चारों ओर एक अलग ही उत्साह देखने को मिला।

ग्रामीणों ने इस देसी बारात का फूलों की वर्षा कर स्वागत किया…
और इस पहल की जमकर सराहना की।

इस अनोखी बारात ने न केवल गांव में, बल्कि पूरे इलाके में लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा।

लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक शादी नहीं… बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने का एक संदेश है।

आज की नई पीढ़ी जहां तेजी से आधुनिकता की ओर बढ़ रही है…
ऐसे में यह पहल उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ने का काम कर रही है।

इस “देसी बारात” की तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं…
और हर कोई इस अनूठे प्रयास की तारीफ करता नजर आ रहा है।

ग्रामीणों का मानना है कि अगर ऐसे ही प्रयास होते रहे…
तो हमारी परंपराएं और सांस्कृतिक पहचान हमेशा जीवित रहेंगी।

वाकई… यह बारात सिर्फ एक शादी नहीं…
बल्कि एक संदेश है—
कि आधुनिकता के बीच भी अपनी मिट्टी से जुड़ा रहना ही असली खूबसूरती है।

By editor