भिलाई में श्रीराम जन्मोत्सव समिति द्वारा आयोजित रामनवमी महोत्सव आज मध्य भारत का सबसे बड़ा धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन बन चुका है। 41वें वर्ष में प्रवेश कर चुके इस भव्य उत्सव के तहत श्रीराम चौक, खुर्सीपार मैदान में 1100 से अधिक ध्वजवाहकों और झांकी प्रमुखों का सम्मान किया गया। समिति विगत 40 वर्षों से लगातार रामनवमी के अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाल रही है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, समिति के संरक्षक एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने कहा कि वर्ष 1986 में जब इस यात्रा की शुरुआत हुई थी, तब भिलाई के कई क्षेत्र आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े थे। उस समय कुछ दर्जन लोग साइकिल और मेटाडोर में प्रभु श्रीराम की तस्वीर लेकर निकले थे, जो आज हजारों ध्वजवाहकों की विराट शोभायात्रा में बदल चुकी है। श्री पाण्डेय ने अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आज विश्व का प्रमुख तीर्थ स्थल बन चुका है, जहाँ करोड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँच रहे हैं। इससे पर्यटन और रोजगार को भी बढ़ावा मिला है।समिति द्वारा चलाया जा रहा एक मुट्ठी दान श्रीराम के नाम अभियान भी सामाजिक एकता का प्रतीक बन गया है। इस अभियान के तहत घर-घर से अन्न संग्रह कर महाप्रसाद तैयार किया जाता है। वहीं युवा विंग अध्यक्ष मनीष पाण्डेय ने बताया कि यह आयोजन अब तीसरी-चौथी पीढ़ी तक पहुँच चुका है और भिलाई की पहचान बन गया है।भिलाई, जिसे मिनी इंडिया कहा जाता है, उसमें रामनवमी के दिन हजारों श्रद्धालु ध्वज लेकर रामलीला मैदान तक पहुँचते हैं। समिति का संकल्प है कि प्रभु श्रीराम के आदर्शों पर चलते हुए यह आयोजन आने वाले वर्षों में और भी भव्य रूप लेगा। रामनवमी के पहले श्री राम जन्मोत्सव समिति के द्वारा ध्वजवाहकों का सम्मान होने से ध्वजवाहकों के हौसले और बुलंद होते हैं साथ ही ध्वज को उठाकर रामलीला मैदान पावर हाउस तक आने की ताकत दोगुना हो जाती है जिससे ध्वजवाहक पूरे श्रद्धा भाव से राम नाम का जयकारा लगाते हुए ध्वज लेकर रामलीला मैदान में एकत्र हो जाते हैं और प्रभु राम की आराधना करते हैं।
भिलाई का रामनवमी महोत्सव बना मध्य भारत का सबसे बड़ा आयोजन

