शहर के विकास की दिशा में एक ओर जहां प्रशासन बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स को अमलीजामा पहनाने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर इन परियोजनाओं से प्रभावित होने वाले आम नागरिकों की चिंता भी लगातार बढ़ती जा रही है।

आपको बता दें कि करीब 2.30 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क का निर्माण प्रस्तावित है, जिसकी कुल लागत लगभग 18 करोड़ 8 लाख रुपये बताई जा रही है। यह सड़क जुनवानी पेट्रोल पंप से शुरू होकर खम्हरिया भाठा, खम्हरिया, कुटेलाभाठा होते हुए आईआईटी जेवरा-सिरसा तक जाएगी।

प्रशासन के मुताबिक यह सड़क शहर के ट्रैफिक दबाव को कम करने और यातायात को सुगम बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना है। लेकिन इस परियोजना को लेकर अब स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।

दरअसल, सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया ने कई परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। बड़ी संख्या में घर इस परियोजना की जद में आ रहे हैं। रहवासियों का कहना है कि उन्होंने वर्षों की मेहनत और जीवनभर की पूंजी लगाकर अपने घर बनाए हैं, जो अब टूटने की कगार पर पहुंच गए हैं।

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि शुरुआत में उन्हें केवल 15 फीट चौड़ी सड़क बनाने की जानकारी दी गई थी, लेकिन अब अचानक 30 से 40 फीट तक की मार्किंग की जा रही है, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ गया है।

कई परिवारों के सामने अब गंभीर संकट खड़ा हो गया है। कुछ घरों में शादी जैसे बड़े पारिवारिक कार्यक्रम भी तय हैं, ऐसे में यदि मकान तोड़े जाते हैं तो वे जाएंगे कहां, यह सबसे बड़ा सवाल बन गया है।

वहीं इस मामले में स्थानीय महिला विधि शर्मा ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि 15 फीट चौड़ी सड़क से किसी को कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन अचानक चौड़ाई बढ़ाकर 30 से 40 फीट करना पूरी तरह अनुचित है।

उन्होंने यह भी बताया कि इस चौड़ीकरण की वजह से क्षेत्र का दुर्गा मंदिर भी प्रभावित हो रहा है, जो स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र है।

इसी मुद्दे को लेकर अब क्षेत्र के लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकार से मांग कर रहे हैं कि सड़क निर्माण को पुराने प्रस्ताव के अनुसार ही किया जाए, ताकि लोगों के घर और उनकी जिंदगी भर की मेहनत सुरक्षित रह सके।

अब देखना होगा कि विकास और जनहित के बीच संतुलन कैसे बनाया जाता है, और प्रशासन इस बढ़ते विरोध के बीच क्या फैसला लेता है।

By editor